
लखनऊ, 23 अगस्त 2026:
रक्षाबंधन पर यूपी की माताओं, बेटियों और बहनों के लिए योगी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। सीएम योगी के निर्देश के मुताबिक 27 अगस्त की रात से 28 अगस्त की रात तक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) की बसों में महिला यात्री अपने एक सहयोगी के साथ मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि त्योहार के दौरान बहनों को सुरक्षित और सुगम तरीके से घर पहुंचाने के लिए परिवहन, पुलिस और प्रशासन पूरी तरह समन्वय के साथ काम करें।
सीएम ने शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों और फील्ड में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में रक्षाबंधन की तैयारियों के साथ प्रदेश में जलभराव, बाढ़, चीनी की उपलब्धता, आगामी गन्ना पेराई सत्र और विद्यालयों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहार के दौरान महिला सुरक्षा और आमजन की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
नशे में चालक मिला तो बस चलाने की अनुमति नहीं
रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में महिलाओं के सफर को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बस चालकों की जांच और निगरानी के विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे का सेवन करने वाले किसी भी चालक को बस चलाने की अनुमति न दी जाए। निजी बसों के चालकों का सत्यापन कराने के साथ ऑटो और टैक्सी चालकों का भी सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएं और प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था सुचारु रखी जाए। महिला सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वाड को भी सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए।
जलभराव पर 24 घंटे निगरानी, नालों की तत्काल सफाई
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, सहारनपुर और गाजियाबाद समेत कई मंडलों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कहीं भी अनावश्यक जलभराव नहीं होना चाहिए। लो-लैंड क्षेत्रों को चिन्हित कर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पम्पिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं। सिल्ट और कूड़े से बंद नालों की तत्काल सफाई कराई जाए और नालों पर हुए अतिक्रमण को चिन्हित कर हटाया जाए।
नगर विकास विभाग को प्रदेश के सभी 762 नगर निकायों की मुख्यालय स्तर से 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। महापौरों और नगर निकाय अध्यक्षों को स्थानीय पार्षदों के साथ मौके पर जाकर जलभराव और सफाई व्यवस्था देखने को कहा गया है। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
19 जिलों में बाढ़ को लेकर अलर्ट
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 19 बाढ़ प्रभावित जिलों की स्थिति की समीक्षा करते हुए डीएम को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए। बलिया, गोंडा, बहराइच, बाराबंकी, फर्रुखाबाद और लखीमपुर खीरी समेत प्रभावित जिलों में कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय रखने को कहा गया। बाढ़ प्रभावित हर परिवार तक राहत पहुंचाने, पर्याप्त पका भोजन और सूखा खाद्यान्न उपलब्ध कराने तथा राहत सामग्री का व्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

नदी कटान वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी और जरूरत पड़ने पर समय रहते ड्रेजिंग कराने को कहा गया। जिन लोगों के मकान बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें भूमि का पट्टा देकर मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। बहराइच में मानव-वन्यजीव संघर्ष और सीमावर्ती जिलों में तस्करी की गतिविधियों पर भी मुख्यमंत्री ने सख्त निगरानी के निर्देश दिए।
स्कूलों के भ्रामक वीडियो पर सख्ती
कतिपय जिलों में स्कूल-कॉलेजों को लेकर प्रसारित हो रहे भ्रामक वीडियो पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने गलत सूचना फैलाकर माहौल खराब करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही मिड-डे मील, शौचालय, कक्षाओं और अन्य सुविधाओं की स्थलीय जांच कराने को कहा। जिलाधिकारियों को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने और बाल वाटिकाओं का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
छह महीने के लिए पर्याप्त चीनी का स्टॉक
चीनी की उपलब्धता की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल लगभग छह महीने की जरूरत के अनुरूप पर्याप्त स्टॉक है। सभी डीएम को चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रखने तथा कालाबाजारी, जमाखोरी और कृत्रिम अभाव पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जरूरत पड़ने पर चीनी मिलों को चलाने की व्यवस्था करने की बात भी कही गई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक किसानों को 3.25 लाख करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने किसानों से जुड़ी भुगतान व्यवस्था को प्राथमिकता के साथ बनाए रखने के निर्देश दिए।
बैठक में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा समेत वरिष्ठ अधिकारी, मंडलायुक्त, डीएम, एसपी एवं एसएसपी, सीडीओ, नगर आयुक्त, नगर निकायों के अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे।






