Uttar Pradesh

मिशन शक्ति का महाअसर : UP की बेटियां बनीं निडर, आत्मनिर्भर और नेतृत्व की नई पहचान

10 लाख से अधिक बालिकाओं को मिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण, 89 हजार छात्राओं ने निभाई ‘एक दिन की अधिकारी’ की भूमिका, महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण का प्रभावी मॉडल बनकर उभरा मिशन शक्ति अभियान

लखनऊ, 9 जून 2026:

महिला सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में रहने वाला यूपी अब महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल बनकर उभरा है। मिशन शक्ति अभियान ने प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा दी है। यही वजह है कि मिशन शक्ति आज सामाजिक परिवर्तन और महिला सशक्तीकरण के प्रभावी मॉडल के रूप में पहचान बना चुका है।

योगी सरकार ने महिला सशक्तीकरण को सुरक्षा तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, आत्मरक्षा, डिजिटल साक्षरता, आर्थिक स्वावलंबन और नेतृत्व विकास को भी इससे जोड़ा। अभियान के तहत प्रदेश के विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बड़े पैमाने पर आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए। 10 लाख से अधिक बालिकाओं को जूडो-कराटे और सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण देकर उन्हें शारीरिक रूप से सक्षम और मानसिक रूप से आत्मविश्वासी बनाया गया।

महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हेल्पलाइन सेवाओं, साइबर सुरक्षा, महिला अधिकारों और कानूनी संरक्षण संबंधी व्यापक अभियान भी चलाए गए। इन प्रयासों से महिलाओं और बालिकाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है तथा सुरक्षा के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

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मिशन शक्ति की सबसे अनूठी पहल ‘एक दिन की अधिकारी’ कार्यक्रम रही है। इसके तहत 89 हजार से अधिक बालिकाओं को प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव कराया गया। विद्यालय, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर अधिकारियों की भूमिका निभाते हुए छात्राओं ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से समझा और नेतृत्व कौशल विकसित किया। इस पहल ने बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का आत्मविश्वास प्रदान किया है।

मीना मंच, मीना दिवस, जनसंवाद, रैलियों और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से अभियान का संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया गया। लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी ने बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान को सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बना दिया। इसके साथ ही बाल विवाह निषेध, लैंगिक समानता, साइबर सुरक्षा और महिला अधिकारों को लेकर व्यापक जनजागरूकता भी पैदा हुई।

मिशन शक्ति ने महिलाओं को डिजिटल और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों, बैंक भ्रमण और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं ने महिलाओं और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है।

सबसे बड़ा बदलाव सामाजिक सोच में देखने को मिला है। बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर सकारात्मक माहौल बना है तथा विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ी है। महिला सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस नीति और मिशन शक्ति के प्रभावी क्रियान्वयन ने महिलाओं में भरोसे का नया वातावरण तैयार किया है। आज उत्तर प्रदेश की बेटियां शिक्षा, खेल, विज्ञान, प्रशासन और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।

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