लखनऊ, 20 मई 2026:
एक समय पिछड़ेपन, बदहाल सड़कों और धीमी विकास गति के लिए पहचाना जाने वाला यूपी आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का सबसे बड़ा मॉडल बनकर उभरा है। बीते नौ वर्षों में प्रदेश ने एक्सप्रेसवे क्रांति के जरिए अपनी नई पहचान एक्सप्रेसवे स्टेट के रूप में स्थापित कर ली है। आज यूपी में 1900 किलोमीटर से अधिक का एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार हो चुका है। इसने सफर आसान करने के साथ आर्थिक विकास की नई इबारत भी लिखनी शुरू कर दी है।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। गाजीपुर से दिल्ली तक का सफर अब लगभग 10 घंटे में पूरा हो रहा है। मेरठ से प्रयागराज की दूरी गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए आधे समय में तय की जा सकेगी। तेज रफ्तार सड़कों ने व्यापार, निवेश और उद्योगों को नई ऊर्जा दी है।
योगी सरकार ने केवल सड़क निर्माण तक खुद को सीमित नहीं रखा। इसके साथ एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक विकास का मजबूत मॉडल भी तैयार किया है। सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड के ट्रिपल-एस मॉडल के तहत इंडस्ट्रियल पार्क, लॉजिस्टिक हब और क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इससे प्रदेश में लाखों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे अब डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की रीढ़ बन चुका है। झांसी और चित्रकूट में रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना से निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। वहीं वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना को भी एक्सप्रेसवे नेटवर्क का बड़ा लाभ मिला है। कन्नौज का इत्र, कानपुर का चर्म उद्योग और पूर्वांचल के हस्तशिल्प अब तेज परिवहन व्यवस्था के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेजी से पहुंच रहे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि विकास अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। संपर्क मार्गों और ग्रामीण सड़कों के जरिए गांव और छोटे कस्बे भी एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। किसान अब अपने कृषि और दुग्ध उत्पाद कम समय में बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो रही है।
करीब 36 लाख करोड़ रुपये के सकल घरेलू उत्पाद और लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्तावों के साथ उत्तर प्रदेश अब देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।






