Uttarakhand: नौकरी के लिए दिल्ली-यूरोप की राह छोड़ी, पहाड़ में खड़ा किया फल कारोबार, 120 महिलाओं को रोजगार
पौड़ी के दीपक नौटियाल ने 30 नाली जमीन पर शुरू की कीवी और दूसरे फलों की खेती, अब दिल्ली-मुंबई से बेंगलुरु तक पहुंच रहे उत्पाद, महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़कर बनाया स्वरोजगार का मॉडल

योगेंद्र मलिक
पौड़ी गढ़वाल, 11 अक्टूबर 2026:
नौकरी की तलाश में पहाड़ से मैदान और फिर विदेश जाने वाले युवाओं के बीच पौड़ी गढ़वाल के दीपक नौटियाल ने एक अलग राह चुनी। दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2021 में अपने गांव लौटकर बागवानी को आजीविका का माध्यम बनाया। आज बैंजवाड़ी में 30 नाली जमीन पर शुरू हुआ उनका फल उत्पादन का फार्म केवल खेती तक सीमित नहीं है। स्थानीय महिलाओं के रोजगार, फल प्रसंस्करण और देशभर में मार्केटिंग का जरिया भी बन रहा है। उनके इस प्रयास से करीब 10 से 12 महिला स्वयं सहायता समूहों की 120 महिलाएं रोजगार और आजीविका के अवसरों से जुड़ी हैं।
50 पौधों से शुरू हुआ सफर, अब 250 कीवी के पौधे
दीपक ने अपने फार्म में शुरुआत में कीवी के 50 पौधे लगाए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ाई और अब फार्म में कीवी के करीब 250 पौधे हैं। इसके अलावा 400 सेब के पौधे और नींबू-माल्टा के लगभग 150 पौधे लगाए गए हैं। फार्म में पुलम, एप्रिकॉट सहित अन्य फलों का भी उत्पादन किया जा रहा है। दीपक के अनुसार यहां एक सीजन में करीब 18 क्विंटल कीवी का उत्पादन होता है। कीवी की तुड़ाई अक्टूबर में की जाती है।
बागवानी को विस्तार देने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से 80 प्रतिशत सब्सिडी के तहत सहयोग लिया। सिंचाई के लिए विभाग की ओर से टैंक उपलब्ध कराया गया। कृषि विभाग ने फार्म में घेरबाड़ कराई। इस तरह सरकारी सहायता और निजी प्रयासों के मेल से पहाड़ की जमीन पर फल उत्पादन को आगे बढ़ाया गया।

खेती से आगे बढ़कर महिलाओं के लिए रोजगार की राह
दीपक के फार्म की खासियत यह है कि यहां उत्पादित फलों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में स्थानीय महिला समूहों को भी शामिल किया गया है। फार्म से फल निकालने के बाद उन्हें महिला समूहों तक पहुंचाया जाता है जहां महिलाएं सफाई, प्रसंस्करण और विभिन्न उत्पाद तैयार करने से जुड़े काम करती हैं। बुरांश, जैम, चटनी, अचार और बिस्किट जैसे उत्पाद तैयार कर स्थानीय संसाधनों को व्यावसायिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
तैयार उत्पादों की पैकेजिंग दिल्ली में की जाती है। इसके बाद उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े समूहों के माध्यम से करीब 120 महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। इस पहल ने बागवानी को महिला स्वरोजगार से जोड़ने की संभावनाएं भी दिखाई हैं।
ऑनलाइन मार्केटिंग से देश के बड़े शहरों और यूरोप तक पहुंच
उत्पादों की बिक्री के लिए दीपक ने ‘रंगीलो छबीलो ग्रुप’ के माध्यम से ऑनलाइन मांग और मार्केटिंग की व्यवस्था बनाई है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न शहरों से उत्पादों की मांग आती है। कुछ उत्पाद यूरोप तक भी पहुंचाए जाते हैं। मार्केटिंग से जुड़े कार्यों में करीब 22 लोगों की टीम जुटी हुई है।
दीपक बताते हैं कि सामान्य दिनों में फार्म में चार लोग काम करते हैं। सीजन के दौरान 10 से 15 लोगों को रोजगार मिलता है। वह खेती और बागवानी में बिना दवाइयों के उत्पादन पर भी जोर दे रहे हैं। दीपक नौटियाल की यह पहल पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाएं केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं हैं। उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की कड़ियों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। स्थानीय संसाधनों को बाजार से जोड़ने का यह प्रयास पहाड़ के युवाओं के लिए नई राह दिखाने वाला है।






