एमएम खान
मोहनलालगंज (लखनऊ), 30 मई 2026:
मोहनलालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार सुबह एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया। पेट दर्द, उल्टी और दस्त से पीड़ित बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे परिजनों ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी में तैनात फार्मासिस्ट ने खुद को डॉक्टर बताते हुए इलाज शुरू कर दिया और डॉक्टर के बारे में पूछने पर अभद्र व्यवहार किया। मामले की शिकायत के बाद सीएचसी अधीक्षक ने फार्मासिस्ट से स्पष्टीकरण मांगते हुए उसके स्थानांतरण की संस्तुति मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेज दी है।
परिजनों के अनुसार शनिवार सुबह करीब छह बजे बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर उसे लेकर सीएचसी पहुंचे थे। आरोप है कि उस समय अस्पताल में सन्नाटा था और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी सो रहे थे। काफी प्रयास के बाद कर्मचारियों को जगाया गया और डॉक्टर को बुलाने की मांग की गई।
बताया गया कि इसके बाद एक कर्मचारी ने अंदर से फार्मासिस्ट विवेक शर्मा को बुलाया। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने स्वयं को डॉक्टर बताते हुए बच्ची का उपचार शुरू कर दिया। जब परिजनों ने डॉक्टर के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वही डॉक्टर हैं और इलाज कराना है तो कराएं। इस दौरान अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया।
मामले की जानकारी मिलने पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिवाकर ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक मौके पर पहुंचे और बच्ची का परीक्षण किया। हालांकि परिजन बच्ची को लेकर निजी अस्पताल चले गए।
ये पूरा प्रकरण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कुर्सी पर अंगड़ाई लेते फार्मासिस्ट की फोटो, वीडियो और शिकायत वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। सीएचसी अधीक्षक द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि फार्मासिस्ट विवेक शर्मा के खिलाफ नाइट ड्यूटी के दौरान लापरवाही और मरीजों से दुर्व्यवहार की शिकायतें पहले भी मिल चुकी हैं। उन्हें कई बार चेतावनी दी गई और कार्यशैली में सुधार के निर्देश भी दिए गए, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
अधीक्षक ने अपने पत्र में कहा है कि 30 मई की सुबह बच्ची के उपचार के दौरान फार्मासिस्ट द्वारा स्वयं इलाज शुरू करना और स्वयं को डॉक्टर बताना गंभीर अनुशासनहीनता है। इस संबंध में उनसे लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
सीएचसी अधीक्षक ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से अनुरोध किया है कि विवादों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विवेक शर्मा का स्थानांतरण कर उनके स्थान पर किसी अन्य फार्मासिस्ट की नियुक्ति की जाए। उधर, पीड़ित परिवार ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और चिकित्सकीय निगरानी पर सवाल उठाते हुए मामले की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री से करने की बात कही है।






