लखनऊ, 29 मई 2026:
यूपी की पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि बदलते दौर में पुलिसिंग केवल कानून व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक, साइबर अपराधों की समझ, फॉरेंसिक दक्षता, संवाद कौशल और संवेदनशील व्यवहार अब प्रभावी पुलिसिंग की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को पूरी तरह परिणामोन्मुख, व्यवहारिक, तकनीक आधारित और समयानुकूल बनाया जाए। इससे उत्तर प्रदेश पुलिस देश की सबसे दक्ष, अनुशासित और जनविश्वास वाली पुलिस फोर्स के रूप में स्थापित हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को केवल कानून लागू करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें मानवीय व्यवहार, तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेने और बेहतर संवाद कौशल के लिए भी प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय के अंतर्गत पुलिस अकादमी मुरादाबाद, 11 प्रशिक्षण संस्थान, 6 पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, 2 आर्म्ड पुलिस ट्रेनिंग संस्थान तथा 62 अस्थायी एवं 31 स्थायी रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर संचालित हैं। वर्तमान में प्रदेश में प्रशिक्षण क्षमता को 18 हजार से बढ़ाकर 60,244 तक पहुंचा दिया गया है। 112 आरटीसी पर एक साथ प्रशिक्षण शुरू कर अंतिम परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गईं और एक साथ परिणाम घोषित किए गए।
प्रदेश सरकार प्रशिक्षण को पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। यूपी पुलिस ट्रेनिंग पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षकों और प्रशिक्षुओं को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। 5,000 विशेषज्ञ प्रशिक्षक तैयार किए गए हैं। बैठक में बताया गया कि मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT पोर्टल पर प्रदेश पुलिस ने देशभर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 27 मई 2026 तक 3,90,799 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। 59 लाख से अधिक कोर्स पूरे किए जा चुके हैं।
गत 2 अप्रैल से 10 अप्रैल तक आयोजित साधना सप्ताह में प्रदेश पुलिस ने देश की सभी राज्य पुलिस और केंद्रीय पुलिस बलों में पहला स्थान प्राप्त किया। इस दौरान यूपी पुलिस कर्मियों ने अकेले 28 लाख से अधिक कोर्स पूरे किए। वहीं 2,45,645 कर्मियों ने एआई आधारित कोर्स भी पूर्ण किए।
बैठक में बताया गया कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में 11 नए संवेदनशीलता मॉड्यूल जोड़े गए हैं। एटीएस, एसटीएफ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, यूपी-112, विमेन पावरलाइन और फायर सर्विसेज जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा ऑपरेशनल मॉक ड्रिल और कैप्सूल कोर्स भी संचालित किए जाएंगे।
इसके साथ ही ड्रोन प्रशिक्षण, साइबर फॉरेंसिक लैब, ड्राइविंग सिम्युलेटर और फायरिंग सिम्युलेटर जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार ही पुलिस की वास्तविक पहचान बनाता है। इसी दिशा में जनता से दुर्व्यवहार की शिकायत वाले 5,816 पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उनके लिए विशेष संवाद कौशल और सौम्य व्यवहार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई द्वारा भी पुलिसकर्मियों को विशेष सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण दिया गया।
बैठक में यह भी बताया गया कि पहली बार मुरादाबाद पुलिस अकादमी में मालदीव पुलिस सेवा के उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। मुख्यमंत्री ने इसे भारत और पड़ोसी देशों के बीच आंतरिक सुरक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्रणाली में निरंतर नवाचार, जवाबदेही और आधुनिकता सुनिश्चित की जाए जिससे प्रदेश पुलिस हर चुनौती का सामना अधिक संवेदनशीलता, दक्षता और प्रोफेशनल क्षमता के साथ कर सके।






