
राजकिशोर तिवारी
बदरीनाथ, 20 सितंबर 2026ः
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए। सीएम ने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की। इसके बाद सीएम ने बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत चल रहे निर्माण एवं विकास कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। धामी ने आस्था पथ समेत विभिन्न निर्माणाधीन कार्यों का जायजा लेते हुए अधिकारियों को सभी काम निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और समय से पूरा करने के निर्देश दिए।
श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता
सीएम ने कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता में रहे। साथ ही बदरीनाथ धाम की धार्मिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक गरिमा से किसी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम को उसके धार्मिक और पौराणिक महत्व के अनुरूप भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में कार्य चल रहा है। मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही सुविधाओं से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि विकास के साथ धाम की पारंपरिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक स्वरूप का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है।

कथा महोत्सव में उमड़ा संतों-श्रद्धालुओं का सैलाब
मुख्यमंत्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के तहत आयोजित ‘बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव’ में भी पहुंचे। महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 150 से अधिक संत-साध्वी और 1200 से अधिक हरिभक्त शामिल हुए। सीएम ने कहा कि बदरीनाथ धाम आना अपने आप में विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभूति है। संतों और श्रद्धालुओं के बीच कथा महोत्सव में सहभागी होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने बदरीनाथ धाम को सनातन चेतना और भारत की आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि यह भूमि सदियों से तप, साधना और आध्यात्मिक चेतना की केंद्र रही है।

तीर्थ विकास में आस्था और विरासत का संतुलन
धामी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि चारधाम समेत प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों का विकास श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप सुव्यवस्थित ढंग से हो, लेकिन विकास की इस प्रक्रिया में धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक गरिमा अक्षुण्ण रहे। उन्होंने कहा कि संत समाज का आशीर्वाद और मार्गदर्शन समाज व राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणादायी रहा है। ऐसे आयोजनों से सनातन परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है। कार्यक्रम में महंत स्वामी देवप्रसाद दास, स्वामी सद्गुरुवर्य धर्मवल्लभ दास समेत संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।






