देहरादून, 9 जून 2026:
उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले सरकार ने तैयारियों को लेकर पूरी मशीनरी को अलर्ट कर दिया है। सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए कि बरसात शुरू होने से पहले सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क, बिजली, पेयजल समेत सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि मानसून के बाद 15 नवंबर तक प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए। पिछले साल आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में बचा हुआ काम बरसात शुरू होने से पहले पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। पुलों, कल्वर्टों और ड्रेनेज सिस्टम की जांच कर जरूरी मरम्मत कराने, नालों और जल निकासी मार्गों की सफाई समय रहते पूरी करने को कहा गया।
स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने जीवनरक्षक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और एम्बुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। डीएम अपने जनपदों में गर्भवती महिलाओं की अद्यतन सूची तैयार रखें। दुर्गम और संवेदनशील इलाकों की गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पतालों के आसपास ठहरने की व्यवस्था की जाए। जरूरत पड़ने पर हेली एम्बुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
बैठक में भूस्खलन, बाढ़ और भू-कटाव प्रभावित क्षेत्रों का नया मानचित्र तैयार करने के निर्देश दिए गए। ऐसे गांवों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सूची भी बनाई जाएगी जो आपदा के लिहाज से संवेदनशील हैं। चारधाम यात्रा मार्ग समेत राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर चिन्हित संवेदनशील स्थानों का भौतिक निरीक्षण करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जेसीबी, पोकलैंड, डंपर, क्रेन जैसी मशीनें पहले से संवेदनशील स्थानों पर तैनात रखी जाएं। जिन इलाकों में हर साल बरसात के दौरान सड़कें बाधित होती हैं, वहां वैकल्पिक मार्ग भी तैयार रखे जाएं। सभी प्रभारी सचिव अपने-अपने जिलों का दौरा कर तैयारियों का जायजा लेंगे।
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक और सूचना बोर्ड लगाने, तहसील स्तर पर राहत सामग्री का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और जिला नियंत्रण कक्षों के बीच चौबीसों घंटे समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया। मौसम संबंधी अलर्ट गांव स्तर तक पहुंचाने और पर्यटकों को समय पर जानकारी देने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बरसात के दौरान बिजली, पेयजल, सड़क और दूरसंचार जैसी मूलभूत सेवाएं लंबे समय तक बाधित न हों, इसके लिए विभाग पहले से कार्ययोजना तैयार करें। एसटीपी और पुलों के आसपास की विद्युत लाइनों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए गए।
इस बीच कैंचीधाम में बढ़ती भीड़ और जाम की समस्या को देखते हुए कैंचीधाम बाईपास को बुधवार से यातायात के लिए खोलने का फैसला लिया गया है। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन वर्किंग ग्रुप की बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना पर खुशी जताई। उन्होंने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ, यूएलएमएमसी और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों को बधाई देते हुए इसे तकनीक आधारित कार्यप्रणाली और लगातार किए जा रहे नवाचारों का नतीजा बताया।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने मानसून तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिला, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






