
लखनऊ, 5 सितंबर 2026:
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शनिवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी पर भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और दलित-पिछड़ा विरोधी राजनीति करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने खास तौर पर 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशों के बावजूद अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ईको गार्डन में आंदोलन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों के साथ आम आदमी पार्टी मजबूती से खड़ी है। इस मुद्दे को संसद में भी उठाएगी।
संजय सिंह ने कहा कि शिक्षक भर्ती में ओबीसी आरक्षण को कथित तौर पर गायब कर दिया गया और अब अभ्यर्थी अपने अधिकार के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सरकार युवाओं के अधिकारों की रक्षा करने का दावा करती है उसी के कार्यकाल में पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
‘डमी पार्टियों’ के जरिए 5500 करोड़ के चंदे का आरोप
संजय सिंह ने गुजरात में पंजीकृत छह राजनीतिक दलों का जिक्र करते हुए दावा किया कि वर्ष 2023-24 में इन दलों को कुल 5500 करोड़ रुपये का चंदा मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन पार्टियों ने महज 15 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे, उनके पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई? उन्होंने आरोप लगाया कि ये भाजपा की डमी पार्टियां हैं और इनके जरिए काले तथा विदेशी धन को सफेद करने का खेल चल रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
मस्जिद और राम मंदिर ट्रस्ट पर भी तीखे आरोप
सहारनपुर में 1911 की पुरानी मस्जिद गिराए जाने के मामले में संजय सिंह ने भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक तनाव पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट और वक्फ से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन बताया। राम मंदिर ट्रस्ट में नई नियुक्तियों को लेकर भी उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर हमला बोला। उनका आरोप था कि दलित समाज के सदस्य को हटाकर विवादित लोगों को महत्वपूर्ण पद दिए गए हैं। उन्होंने इसे मंदिर ट्रस्ट पर कब्जा बनाए रखने की कोशिश बताया।
9 सितंबर को बनेगी 2027 की रणनीति
संजय सिंह ने बताया कि 9 सितंबर को लखनऊ में AAP की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होगी। इसमें जिलाध्यक्षों, सह-प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ 2027 के विधानसभा चुनाव तथा प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।






