लखनऊ, 5 जून 2026:
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले एक दशक में अगर किसी नेता की सबसे अलग और प्रभावशाली पहचान बनी है तो वह योगी आदित्यनाथ हैं। जनता की समस्याओं पर सीधे कार्रवाई करने वाले सख्त प्रशासक कहे जाते हैं, जबकि अपराधियों और माफिया के खिलाफ उनकी सरकार की कार्रवाई ने उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ जैसी राजनीतिक पहचान भी दिलाई। ‘जो जिस भाषा में समझे उसे उसी भाषा में समझाया जाएगा’ ये बात वो सिर्फ कहते नहीं बल्कि अपराधियों के एनकाउंटर व अन्य कार्रवाई से रुख जाहिर भी कर चुके हैं।
शुक्रवार को 54 वर्ष के हुए योगी आदित्यनाथ का सफर एक धार्मिक मठ से शुरू होकर देश के सबसे बड़े राज्य की सत्ता तक पहुंचा है। आज उनके जन्मदिन पर हम उनका अतीत देखें तो पता चलता है कि उन्होंने संन्यासी, सांसद, महंत और मुख्यमंत्री जैसी कई सफल भूमिकाएं निभाईं। गोरक्षपीठ से लखनऊ आवास तक नियमित जनता दर्शन कर वो जमीन की हकीकत से वाकिफ होते रहते हैं वहीं एक दिन में ताबड़तोड़ जिलों के दौरे और बैठकें कर जनप्रतिनिधियों व अफसरों से भी रूबरू होते रहते हैं।

इस व्यस्त दिनचर्या के बीच ही कार्यक्रमों में बच्चों को दुलार कर चाकलेट देना नहीं भूलते। यही लगाव उन्हें जानवरों से भी है। बत्तख को दाना खिलाते हैं तो मोर बेफिक्र होकर उनके हाथों से भोजन कर लेता है। गोवंश उन्हें खास प्रिय हैं। अपने गोरखपुर प्रवास के दौरान गोशाला जाना, सबको नाम से पुकारना, उन्हें गुड़ रोटी खिलाना नहीं भूलते। सत्ता को सेवा बताने वाले योगी आदित्यनाथ ऐसे ही इस मुकाम तक नहीं पहुंचे। यूपी ही नहीं किसी भी राज्य के चुनाव में वो पार्टी के स्टार प्रचारक है। हाल ही में पश्चिम बंगाल के चुनाव में उनकी दहाड़ सुर्खियां बनीं और वहां के चुनावी नतीजे भी।
पहाड़ों में बसे पंचूर गांव में हुआ जन्म
5 जून 1972 को उत्तराखंड के पंचूर गांव में आनंद सिंह बिष्ट एक फॉरेस्ट रेंजर के घर मे उनका जन्म हुआ। सात भाई-बहनों में पांचवें स्थान पर अजय सिंह बिष्ट नाम के बालक की शुरुआती शिक्षा उत्तराखंड में हुई। छात्र जीवन के दौरान ही उनका झुकाव सामाजिक, राष्ट्रवादी और धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ने लगा।

संन्यास से शुरू हुई सार्वजनिक जीवन की यात्रा
90 के दशक की शुरुआत में अजय सिंह बिष्ट उत्तराखंड से गोरखपुर पहुंचे, जहां उनका संपर्क गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ से हुआ। यह मुलाकात उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई। वर्ष 1994 में उन्होंने नाथ परंपरा में संन्यास ग्रहण किया और योगी आदित्यनाथ के नाम से नई पहचान मिली। संन्यास के बाद उन्होंने धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक और जनसरोकार के मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। पूर्वांचल में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और गोरखनाथ मठ के प्रभाव क्षेत्र से निकलकर उनकी पहचान व्यापक होती चली गई।
26 साल की उम्र में संसद पहुंचे
साल 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर से लोकसभा सदस्य चुने गए। महज 26 वर्ष की उम्र में संसद पहुंचने वाले वे उस समय देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल थे। इसके बाद उन्होंने लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीतकर पूर्वांचल की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई। इसी दौर में उनकी पहचान एक फायरब्रांड हिंदुत्ववादी नेता के रूप में बनी। राम मंदिर आंदोलन, गौ संरक्षण, धर्मांतरण, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदू हितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी मुखर राजनीति ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित चेहरा बना दिया।

मुख्यमंत्री बनकर बदली राजनीतिक भूमिका
साल 2017 में भाजपा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिला और योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी राजनीति का केंद्र प्रशासन और शासन व्यवस्था बन गया। उनकी सरकार ने कानून व्यवस्था को सबसे प्रमुख मुद्दा बनाया। अपराधियों और माफिया नेटवर्क के खिलाफ चलाए गए अभियानों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। बुलडोजर कार्रवाई और अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार के कदम समर्थकों के बीच लोकप्रिय रहे, जबकि विपक्ष ने इन्हीं मुद्दों पर सरकार की आलोचना भी की। ये आलोचना भी सरकार के पक्ष में काम करती रही।
विकास और धार्मिक पुनर्जागरण पर जोर
योगी सरकार के कार्यकाल में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, लखनऊ में मिसाइल ब्रम्होस का प्रोडक्शन, नए हवाई अड्डे, निवेश परियोजनाएं और धार्मिक पर्यटन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट चर्चा में रहे। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विकास कार्यों ने भी उनकी राजनीतिक पहचान को नया आयाम दिया।

महंत, लेखक और संपादक भी
राजनीति के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ की पहचान धार्मिक नेतृत्व से भी जुड़ी रही है। वर्ष 2014 में महंत अवैद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद वे गोरक्षपीठाधीश्वर बने। अखिल भारतीय बारह भेष पंथ योगी महासभा के अध्यक्ष के रूप में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। योग साहित्य में भी उनकी विशेष रुचि रही है। ‘यौगिक षटकर्म’, ‘हठयोग: स्वरूप एवं साधना’, ‘राजयोग: स्वरूप एवं साधना’ तथा ‘हिन्दू राष्ट्र नेपाल’ जैसी पुस्तकों का लेखन उन्होंने किया है। गोरखनाथ मंदिर से प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘योगवाणी’ के प्रधान संपादक के रूप में भी वे लंबे समय से जुड़े रहे हैं।
लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड
साल 2022 में योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। करीब चार दशक बाद ऐसा हुआ जब किसी मुख्यमंत्री ने पूर्ण कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में वापसी की। इस जीत ने भाजपा के भीतर और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी स्थिति को और मजबूत किया।

2027 की राजनीति में भी अहम चेहरा
वर्तमान में योगी आदित्यनाथ भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी सक्रिय भूमिका दिखाई देती है। 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच उनकी राजनीतिक रणनीति, प्रशासनिक शैली और नेतृत्व क्षमता पर लगातार नजर बनी हुई है। कम उम्र में ही गोरखनाथ मठ से शुरू हुआ उनका यह सफर आज उत्तर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष तक पहुंच चुका है। फायरब्रांड नेता, महंत, सांसद और मुख्यमंत्री की विभिन्न भूमिकाओं के बीच योगी आदित्यनाथ भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित और प्रभावशाली चेहरों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।






