Uttar Pradesh

लखनऊ में शंकराचार्य का ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद, मंच पर सियासी हलचल, योगी सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने शंकराचार्य को साष्टांग दंडवत कर आशीर्वाद लिया, सपा नेता रविदास मेहरोत्रा भी पहुंचे, बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने सरकार को बताया गैर सनातनी, कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, धर्माचार्य और समर्थक पहुंचे

लखनऊ, 11 मार्च 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में बुधवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ अभियान का औपचारिक शंखनाद करते हुए बड़ा संदेश दिया। कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, धर्माचार्य और समर्थक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय मंच के पास पहुंचे और शंकराचार्य को साष्टांग दंडवत कर आशीर्वाद लिया। वहीं समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

इससे पहले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने एक बयान में ‘कालनेमि’ का उल्लेख किया था। कालनेमि एक ऐसा राक्षस था जो साधु का वेश धारण कर हनुमान जी के सामने गया था। शंकराचार्य ने कहा कि अगर कोई बाहर से गेरुआ वस्त्र धारण कर खुद को योगी कहे, लेकिन उसके शासन में गायों की संख्या कम होती जाए और गोहत्या करने वालों से चंदा लिया जाए, तो यह चिंताजनक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह अभियान किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं बल्कि गौ माता की रक्षा के लिए है।

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इस मौके पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि शंकराचार्य का अपमान पूरे सनातन धर्म का अपमान है। उन्होंने कहा कि लखनऊ से उठी यह आवाज पूरे देश के सनातन समाज को जोड़ने का काम करेगी और शंकराचार्य की मांग पूरी तरह उचित है।

वहीं सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के इस धर्मयुद्ध में समाजवादी पार्टी उनके साथ खड़ी है। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट एवं पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यह सरकार गैर सनातनी है।

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गोरक्षा आंदोलन को लेकर कुछ दिनों चर्चा में आए शंकराचार्य ने 7 मार्च को वाराणसी से अपनी यात्रा शुरू की थी जो जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई और सीतापुर होते हुए मंगलवार को लखनऊ पहुंची। उनके इस आयोजन के लिए लखनऊ प्रशासन ने 26 शर्तों के साथ अनुमति दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभा में किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण नहीं दिया जाएगा। कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

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