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सूर्य ग्रहण आज रात : 4 घंटे 24 मिनट तक अद्भुत खगोलीय नजारा, जानिए धार्मिक मान्यताएं और ग्रहण से जुड़ी कहानी

भारत में दिखाई नहीं देगा, आधी रात के बाद खत्म होगा साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण, ज्योतिष में चार राजयोग बनने की चर्चा

लखनऊ, 12 अगस्त 2026:

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण आज रात लगने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा लेकिन भारत में इसका नजारा दिखाई नहीं देगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और आधी रात (13 अगस्त) 1 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगा। यानी यह खगोलीय घटना कुल 4 घंटे 24 मिनट तक चलेगी। ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ ज्योतिषीय चर्चाएं भी तेज हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा, सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से आंशिक या पूरी तरह रोक देता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण में सूर्य का पूरा प्रकाश कुछ समय के लिए चंद्रमा के पीछे छिप जाता है। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां इसे प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर नहीं मिलेगा।

ग्रहण के साथ बनेंगे चार राजयोग?

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ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार आज ग्रहों की स्थिति से चार प्रमुख राजयोग बनने की चर्चा है। इनमें हंस राजयोग, शशि आदित्य राजयोग, गजकेसरी राजयोग और बुधादित्य राजयोग शामिल हैं। ज्योतिष के अनुसार इन शुभ योगों का प्रभाव कुछ राशियों के लिए सकारात्मक रह सकता है। ग्रहण के साथ इन योगों का बनना इस खगोलीय घटना को और खास बना रहा है। हालांकि, इन प्रभावों को वैज्ञानिक तथ्य नहीं अपितु ज्योतिषीय मान्यता के रूप में देखा जाना चाहिए।

राहु-केतु से जुड़ी है ग्रहण की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यता में सूर्य ग्रहण का संबंध समुद्र मंथन की कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि अमृत पाने के लिए देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ। स्वर्भानु नामक असुर, देवता का रूप धारण कर अमृत पीने के लिए देवताओं की पंक्ति में बैठ गया। सूर्य और चंद्रमा ने उसकी पहचान भगवान विष्णु को बता दी। इसके बाद विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।
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अमृत का स्पर्श हो जाने के कारण उसका सिर और धड़ अमर हो गए। सिर को राहु और धड़ को केतु कहा गया। पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्य और चंद्रमा से शत्रुता के कारण राहु समय-समय पर उन्हें ग्रसता है, जिसे सूर्य और चंद्र ग्रहण से जोड़ा जाता है। यह धार्मिक कथा है.जबकि विज्ञान ग्रहण को चंद्रमा की छाया से होने वाली खगोलीय घटना मानता है।

ग्रहण को लेकर ये हैं धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दौरान बाहर निकलने से बचने और भोजन न करने की परंपरा बताई जाती है। गर्भवती महिलाओं को सुई, कैंची या अन्य धारदार वस्तुओं के इस्तेमाल से बचने की सलाह भी कुछ परंपराओं में दी जाती है। मानसिक शांति के लिए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या गायत्री मंत्र का जाप करने की मान्यता है। चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इन परंपराओं का पालन करना व्यक्तिगत धार्मिक आस्था का विषय है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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