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नैमिषारण्य में ‘वेदारण्यम’ से आध्यात्मिक पर्यटन को नई पहचान, 14.09 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

वेदों की थीम, प्रकृति और आधुनिक सुविधाओं का संगम; श्रद्धालुओं को मिलेगा अनूठा आध्यात्मिक अनुभव

लखनऊ/सीतापुर, 8 अप्रैल 2026:

धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण नैमिषारण्य धाम को एक नए स्वरूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यहां वेद आधारित थीम पर ‘वेदारण्यम’ परियोजना विकसित की जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने करीब 14.09 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना के तहत 7.04 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी गई है।

पर्यटन विभाग द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य पारंपरिक भारतीय ज्ञान, प्राकृतिक संतुलन और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का समन्वय स्थापित करना है। ‘वेदारण्यम’ के रूप में विकसित होने वाला यह परिसर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा।

परियोजना के तहत पूरे क्षेत्र का विकास वास्तु सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। सुरक्षा के लिए यूसीआर कंपाउंड वॉल और चेन लिंक फेंसिंग का निर्माण होगा जबकि म्यूरल वॉल के जरिए क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रवेश द्वारों को प्राकृतिक स्वरूप में विकसित किया जाएगा और विभिन्न स्थानों पर सूचना स्तंभ स्थापित किए जाएंगे।

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परिसर के केंद्र में ‘ब्रह्मस्थान’ का निर्माण किया जाएगा। यह आध्यात्मिक ऊर्जा का मुख्य केंद्र होगा। इसके साथ ही उत्तर-पूर्व दिशा में चक्रतीर्थ से जुड़ा एक पवित्र जोन विकसित किया जाएगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए ट्विन कॉटेज, गजीबो और सीढ़ीनुमा बैठने की व्यवस्था भी की जाएगी। आवागमन हेतु प्राकृतिक पथ और ईंट किनारे वाले मार्ग बनाए जाएंगे। इसके साथ ही पूरे परिसर में दिशासूचक संकेतक बोर्ड लगाए जाएंगे।

‘वेद वन’ की अवधारणा इस परियोजना की विशेषता होगी, जिसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के आधार पर अलग-अलग सेक्शन तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा पंचवृक्ष, आयुर्वेद, नक्षत्र और ‘संसार’ जैसे थीम आधारित क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। आगंतुकों के लिए ऑडियो-गाइडेड ट्री ट्रेल की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे वे पेड़-पौधों के धार्मिक और औषधीय महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

बुनियादी सुविधाओं के तहत शौचालय, टिकट काउंटर, सुरक्षा कक्ष, कैफेटेरिया और पगोडा का निर्माण किया जाएगा। सौंदर्यीकरण के लिए पत्थर पिचिंग, पांच कमल तालाब, तुलसी वृंदावन और आकर्षक मूर्तियां विकसित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त सौर स्ट्रीट लाइट, जल एटीएम, ओवरहेड टंकी और कूड़ेदान जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशन में नैमिषारण्य धाम को एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘वेदारण्यम’ परियोजना के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक और आध्यात्मिक स्वरूप को संरक्षित किया जाएगा।

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि सरकार इस परियोजना को समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना के पूर्ण होने पर यह क्षेत्र न केवल पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।

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