Lucknow City

Sushant Golf City में फंसे 5 हजार खरीदारों को बड़ी राहत, अंसल से छिनेगी कमान, एलडीए पूरा करेगा अधूरे आशियाने

सालों से पैसा लगाने के बाद भी घर-प्लॉट का इंतजार कर रहे खरीदारों के लिए रास्ता साफ, योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद एनसीएलटी में जाएगा टेकओवर प्रस्ताव, 2912 करोड़ की संभावित देनदारी, सुविधाएं पूरी करने में 2216 करोड़ खर्च का अनुमान

लखनऊ, 16 सितंबर 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ के शहीद पथ स्थित सुशांत गोल्फ सिटी में घर या जमीन का सपना लेकर सालों से इंतजार कर रहे करीब पांच हजार खरीदारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अंसल प्रॉपर्टी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की हाईटेक टाउनशिप परियोजना को अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) अपने कब्जे में लेकर पूरा करेगा। योगी कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इसके बाद परियोजना को पूरा करने का प्रस्ताव नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के समक्ष रखा जाएगा।

खरीदारों के लिए इसका मतलब यह है कि वर्षों से अटके मकान, प्लॉट और बुनियादी सुविधाओं के काम को सरकारी एजेंसी के जरिए आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक जिन खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री हो चुकी है अथवा जो वैध आवंटी हैं, उन्हें नियमानुसार भूखंड या भवन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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2912 करोड़ की संभावित देनदारी, सरकार देगी सीड कैपिटल

एलडीए के प्रारंभिक आकलन में परियोजना की अधिकतम संभावित देनदारी करीब 2912 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि वास्तविक देनदारी का निर्धारण इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) की प्रक्रिया से होगा। इसके भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि एलडीए को सरकार की ओर से सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। बाद में नए भूखंडों की बिक्री और परियोजना से होने वाली अन्य आय से यह धनराशि वापस की जाएगी।

50 किलोमीटर सड़कें अधूरी, एक भी सब स्टेशन नहीं

सुशांत गोल्फ सिटी की तस्वीर बताती है कि खरीदारों की परेशानी केवल रजिस्ट्री या कब्जे तक सीमित नहीं है। टाउनशिप में करीब 50 किलोमीटर का रोड नेटवर्क अधूरा है। 440 केवीए और 220 केवीए समेत प्रस्तावित सब-स्टेशनों में से एक भी नहीं बना। नलकूप, पेयजल लाइन, सीवर, पार्क और ड्रेनेज सिस्टम के काम भी लंबित हैं।

इन अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने पर करीब 2216.91 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें पॉकेट-1 से 4 तक 453.10 करोड़, पॉकेट-5 में 1126.52 करोड़, रेलवे ओवरब्रिज के शेष कार्यों पर 114.28 करोड़ और सब-स्टेशनों पर 523 करोड़ रुपये शामिल हैं।

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खरीदारों के हितों की होगी रक्षा

अंसल द्वारा एलडीए में गारंटी के तौर पर 3489 भूखंड बंधक रखे गए थे जिससे परियोजना का विकास न होने पर प्राधिकरण इन्हें बेचकर कॉलोनी का विकास करा सके। जांच में सामने आया कि इनमें से 2747 भूखंड बेच दिए गए। इसके अलावा जांच में ग्राम समाज और नगर निगम की करीब 164 हेक्टेयर भूमि बेचने तथा कंसोर्टियम की जमीन से जुड़ी अनियमितताओं का भी उल्लेख हुआ है। इन मामलों में एलडीए ने अंसल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

2005 से शुरू हुई कहानी, अब एलडीए के हाथ में कमान

अंसल को वर्ष 2005 में हाईटेक टाउनशिप विकसित करने का लाइसेंस मिला था। 2006 में 1765 एकड़ का डीपीआर स्वीकृत हुआ। 2009 में क्षेत्रफल बढ़ाकर 3530 एकड़ और 2013 में दूसरे विस्तार के बाद कुल क्षेत्रफल 6465 एकड़ किया गया। 2015 में इसका डीपीआर स्वीकृत हुआ और फेज-1 से 4 का अंतिम ले-आउट मंजूर हुआ।

2016 में फेज-5 का ले-आउट स्वीकृत किया गया। बाद में संशोधित योजना के तहत 2023 में करीब 4690 एकड़ क्षेत्रफल का डीपीआर स्वीकृत हुआ। इसके बावजूद परियोजना के कई हिस्से अधूरे रहे। खरीदारों को समय पर मकान, प्लॉट और रजिस्ट्री न मिलने के मामले में रेरा में 2268 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। टाउनशिप में करीब 18,858 मकान और प्लॉट विकसित किए जाने हैं।

एनसीएलटी से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

अंसल के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद एलडीए ने आईआरपी के समक्ष करीब 4490 करोड़ रुपये का दावा पेश किया। प्राधिकरण ने एनसीएलएटी का दरवाजा भी खटखटाया। इसके बाद उसे आवश्यक पक्षकार माना गया और टाउनशिप को पूरा करने के संबंध में अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।

अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद एलडीए परियोजना को पूरा करने की योजना एनसीएलटी के समक्ष रखेगा। यानी जिन खरीदारों का पैसा वर्षों से इस अधूरे प्रोजेक्ट में अटका है उनके लिए अब अगला बड़ा पड़ाव एनसीएलटी की प्रक्रिया और एलडीए के टेकओवर की कार्रवाई होगी।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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