न्यूज डेस्क, 29 मई 2026:
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी पास करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया है। अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करनी होगी। इससे पहले तय समय सीमा 31 अगस्त 2027 थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग फिर ठुकरा दी। कोर्ट ने साफ कहा कि गैर अल्पसंख्यक स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को तय समय के भीतर टीईटी पास करनी ही होगी।
इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड समेत कई राज्यों के लाखों शिक्षकों को फिलहाल थोड़ा वक्त जरूर मिल गया है, लेकिन नौकरी पर खतरा पूरी तरह टला नहीं है। तय समय तक टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों को नौकरी छोड़नी पड़ सकती है या उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि केवल नौकरी बचाने की चिंता नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलना भी उतना ही जरूरी है। दरअसल सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा था कि देशभर के गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में पढ़ा रहे कार्यरत शिक्षकों को दो साल के भीतर टीईटी पास करनी होगी। इसी फैसले के खिलाफ कई राज्यों और शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की थीं।
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 23(2) का जिक्र किया। अदालत ने कहा कि कानून में पहले भी प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी को देखते हुए योग्यता हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का प्रावधान रखा गया था।
कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि 2017 में किए गए संशोधन के जरिए 31 मार्च 2015 तक नियुक्त शिक्षकों को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के लिए चार साल की अतिरिक्त राहत दी गई थी। अब नए आदेश के बाद देशभर के कार्यरत शिक्षकों के पास टीईटी पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय रहेगा। हालांकि प्रमोशन पाने के लिए भी टीईटी अनिवार्य रहेगी।






