लखनऊ, 13 मई 2026:
यूपी के परिषदीय विद्यालयों में अब पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। योगी सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब स्कूलों में केवल बच्चों की मौजूदगी नहीं अपितु उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता ही शिक्षा व्यवस्था की असली कसौटी होगी। इसी बड़े बदलाव की तैयारी के तहत निपुण भारत मिशन के तहत प्रदेशभर के एआरपी और डायट मेंटर्स को आधुनिक शिक्षण तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
लखनऊ स्थित राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में 16 से 20 मई तक आयोजित होने वाले पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई जिलों के अकादमिक सहयोगी हिस्सा लेंगे। इस दौरान शिक्षकों को यह सिखाया जाएगा कि बच्चों को केवल किताबें पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें भाषा समझने, पढ़ने, सोचने और गणितीय तर्क विकसित करने के लिए गतिविधि आधारित तरीके अपनाने होंगे।
योगी सरकार की नई रणनीति का फोकस अब स्कूल चलो अभियान से आगे बढ़कर बच्चा कितना सीख रहा है पर केंद्रित हो गया है। यही वजह है कि एफएलएन यानी फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। प्रशिक्षण में एनसीईआरटी आधारित पढ़ाई, बच्चों की सीखने की गति पहचानने के तरीके, रोचक कक्षा संचालन और सहभागिता आधारित शिक्षण मॉडल पर विशेष जोर रहेगा।
इस कार्यक्रम में आगरा, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बरेली, बुलंदशहर, देवरिया, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, जौनपुर, लखीमपुर खीरी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, शाहजहांपुर, सीतापुर और उन्नाव समेत कई जिलों के प्रतिभागी शामिल होंगे। राज्य स्तर पर प्रशिक्षित होने के बाद यही संदर्भदाता अपने जिलों में हजारों शिक्षकों और शिक्षामित्रों को नई शिक्षण पद्धति की ट्रेनिंग देंगे।
प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि चयन उन्हीं प्रतिभागियों का होगा जिन्हें हिंदी, गणित और अंग्रेजी विषयों की बेहतर समझ हो और जो जिला स्तर पर प्रभावी प्रशिक्षण देने में सक्षम हों। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त डायट मेंटर्स को भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
दरअसल, सरकार मानती है कि मजबूत प्राथमिक शिक्षा ही बच्चों के भविष्य की असली नींव है। इसलिए अब परिषदीय विद्यालयों में केवल पाठ्यपुस्तक आधारित पढ़ाई नहीं बल्कि बच्चों की समझ, संवाद क्षमता और तार्किक सोच विकसित करने वाले मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।






