लखनऊ, 14 मई 2026:
यूपी सरकार अब गोसंरक्षण को सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और रोजगार से जोड़ने जा रही है। प्रदेश के करीब 7500 गो आश्रय स्थलों को अब गोबर आधारित जैविक खाद उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार की योजना है कि इन गोशालाओं में बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार कर किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाए। इसे योगी सरकार का गोसंरक्षण और प्राकृतिक खेती को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है।
सरकार की ओर से तैयार की जा रही जैविक खाद को 50 किलो के पैकेट में किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इसकी गुणवत्ता जांच कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य एजेंसियों के माध्यम से कराई जाएगी। योजना का मकसद किसानों को रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में सस्ती और टिकाऊ जैविक खाद उपलब्ध कराना है जिससे खेती की लागत घटे और उत्पादन बेहतर हो सके।

इस पूरी योजना में ग्रामीण युवाओं, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों की बड़ी भूमिका तय की गई है। गोबर से खाद निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन तक के कार्यों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे। इसके लिए सरकार प्रशिक्षकों की टीम भी तैयार करेगी जो गांवों में लोगों को जैविक खाद और गो आधारित उत्पाद तैयार करने की ट्रेनिंग देंगे।
यूपी गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता कुछ के मुताबिक पहली बार प्रदेश में गोबर को आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की व्यापक रणनीति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच यह योजना किसानों और पशुपालकों दोनों के लिए गेमचेंजर साबित होगी।
योगी सरकार ने गोसंरक्षण अभियान के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके साथ वृहद गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में इस समय लगभग 12.5 लाख गोवंश 7500 गो आश्रय स्थलों में संरक्षित हैं। सरकार अब इन्हीं गोशालाओं को आत्मनिर्भर मॉडल में बदलने की तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अब तक करीब सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से अधिक गोवंश सौंपे जा चुके हैं। सरकार प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन डीबीटी के जरिए सीधे पशुपालकों के खातों में भेज रही है। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है। सरकार का मानना है कि गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल आने वाले समय में यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनेगा।






