Uttar Pradesh

यूपी : कंपनियों को लुभा रहा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर… 35 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले

रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण का बड़ा केंद्र बनता उत्तर प्रदेश, 62 कंपनियों को भूमि आवंटित और कई इकाइयों में उत्पादन शुरू

लखनऊ, 13 मार्च 2026:

उत्तर प्रदेश को रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2018 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए प्रदेश को रक्षा उत्पादन के राष्ट्रीय और वैश्विक मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने की योजना पर काम हो रहा है।

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी की ओर से विकसित किए जा रहे इस कॉरिडोर के छह नोड कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट में औद्योगिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक कॉरिडोर में अब तक 35,526 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इस परियोजना के लिए 2,040 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई है, जिसमें से 977.54 हेक्टेयर जमीन उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है। रक्षा और उससे जुड़े विनिर्माण कार्यों के लिए अब तक 62 कंपनियों को भूमि दी गई है, जबकि करीब 11 कंपनियों के साथ लीज डीड की प्रक्रिया चल रही है।

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अलग-अलग नोड्स में बढ़ रहा निवेश

कॉरिडोर के अलग-अलग नोड्स में निवेश प्रस्ताव तेजी से बढ़ रहे हैं। कानपुर में 12,803 करोड़ रुपये, झांसी में 11,738 करोड़ रुपये और लखनऊ में 4,850 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इसी तरह अलीगढ़ में 4,490 करोड़ रुपये, चित्रकूट में 880 करोड़ रुपये और आगरा में 607 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेशों से प्रदेश में रक्षा उद्योग के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार हो रहा है।

नौ प्रमुख इकाइयों में शुरू हुआ उत्पादन

कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में अब तक नौ प्रमुख विनिर्माण इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है। इसे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कानपुर में अदानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत से गोला-बारूद निर्माण संयंत्र स्थापित किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है।

अलीगढ़ नोड में अमिटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने लगभग 330 करोड़ रुपये के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सैटेलाइट तकनीक से जुड़े उपकरणों का उत्पादन शुरू किया है। इसके अलावा वेरीविन डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड और नित्या क्रिएशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने छोटे हथियारों और प्रिसिशन आर्म्स के कंपोनेंट्स का निर्माण शुरू किया है।

लखनऊ नोड बन रहा नया रक्षा क्लस्टर

लखनऊ नोड भी तेजी से रक्षा विनिर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। यहां एरोलॉय टेक्नोलॉजीज ने करीब 320 करोड़ रुपये के निवेश से टाइटेनियम कास्टिंग का उत्पादन शुरू किया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से ब्रह्मोस एनजी मिसाइल सिस्टम के निर्माण की दिशा में काम शुरू किया है।

संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस ने रक्षा सुरक्षा उपकरण और परिधान बनाने की शुरुआत की है। वहीं कानपुर नोड में एआर पॉलिमर्स और आधुनिक मटेरियल्स एंड साइंसेज ने बैलिस्टिक मटेरियल्स और डिफेंस टेक्सटाइल्स का उत्पादन शुरू किया है।

रोजगार और तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और उद्योग अनुकूल नीतियों का लाभ मिल रहा है। इससे निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। यह परियोजना केवल रक्षा निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि एमएसएमई, स्टार्टअप और नवाचार आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा दे रही है।

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