UP Education : अब गांव से शहर की दूरी नहीं रोकेगी पढ़ाई, डिजिटल लाइब्रेरी ने खोले ज्ञान के नए द्वार
बहराइच के खसहा मोहम्मदपुर से बदली तस्वीर: किताबों से लेकर हाई-स्पीड इंटरनेट तक, गांव में ही प्रतियोगी परीक्षाओं और ई-लर्निंग की तैयारी, 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंची डिजिटल लाइब्रेरी

लखनऊ, 5 अक्टूबर 2026:
UP के गांवों में अब पढ़ाई के लिए शहर की ओर देखने की मजबूरी तेजी से खत्म हो रही है। कभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबों, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसे संसाधनों की तलाश में युवाओं को गांवों से शहरों का रुख करना पड़ता था लेकिन अब डिजिटल लाइब्रेरी गांवों में ही ज्ञान और तकनीक का नया केंद्र बन रही हैं। बहराइच के तेजवापुर ब्लॉक स्थित खसहा मोहम्मदपुर की ग्राम पंचायत डिजिटल लाइब्रेरी इस बदलाव की जीवंत तस्वीर पेश कर रही है।
ग्राम पंचायत सचिवालय में तैयार इस डिजिटल लाइब्रेरी में किताबों के साथ आधुनिक तकनीक को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया गया है। यहां कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जरूरी पुस्तकों के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध है। ऐसे में युवाओं को पढ़ाई के लिए जरूरी पारंपरिक और डिजिटल दोनों संसाधन गांव में ही मिल रहे हैं।
संसाधन घर के करीब पहुंचे तो सपनों की राह भी आसान हुई। गांव के बच्चे और युवा यहां नियमित अध्ययन कर रहे हैं, ई-लर्निंग से जुड़ रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को नई धार दे रहे हैं। शहर आने-जाने में खर्च होने वाला समय और पैसा अब उनकी पढ़ाई में लगाया जा रहा है। अभिभावकों के लिए भी यह बदलाव राहत और भरोसे का आधार बना है।
यह पहल केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। वर्ष 2017 से पहले ई-लाइब्रेरी की पहुंच राज्य और जिला स्तर के करीब 76 स्थानों तक सीमित थी, जबकि आज डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुकी है। डिजिटल शिक्षा को स्कूलों तक सीमित रखने के बजाय युवाओं को तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। करीब 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं।
अब शहर की दूरी नहीं रोकेगी पढ़ाई, गांव में खुला ज्ञान का डिजिटल द्वार…
कभी गांव के किसी बच्चे को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करनी होती थी तो किताबों और बेहतर संसाधनों के लिए शहर की ओर देखना पड़ता था। दूरी समय भी लेती थी और पैसा भी। अब बहराइच के तेजवापुर ब्लॉक के खसहा मोहम्मदपुर में यही दूरी डिजिटल लाइब्रेरी ने कम कर दी है।
ग्राम पंचायत सचिवालय में तैयार यह लाइब्रेरी किताब और कंप्यूटर, परंपरागत अध्ययन और आधुनिक तकनीक को एक छत के नीचे जोड़ रही है।
यहां कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी की सुविधा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध है। यानी पढ़ने के लिए पुस्तक चाहिए या तैयारी के लिए डिजिटल कंटेंट, दोनों अब गांव में ही सुलभ हैं।
संसाधन करीब आए तो सपनों की राह भी आसान हुई। बच्चे और युवा यहां अध्ययन कर रहे हैं, ई-लर्निंग से जुड़ रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को नई धार दे रहे हैं। जो समय और पैसा पहले शहर आने-जाने में लगता था, वह अब उनकी पढ़ाई में लग रहा है।
यह बदलाव केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। 2017 से पहले ई-लाइब्रेरी की पहुंच राज्य और जिला स्तर के लगभग 76 स्थानों तक सीमित थी, आज डिजिटल लाइब्रेरी 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुकी है। डिजिटल शिक्षा को केवल स्कूलों तक सीमित न रखते हुए लगभग 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। आज प्रदेश के 32,000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15,000 से अधिक विद्यालयों में ICT लैब के माध्यम से शिक्षा को नई तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
वहीं, 2012-16 में पर्याप्त सरकारी निधि होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिलीं और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिली। शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता से लेकर उनकी पहुंच तक, उत्तर प्रदेश ने एक लंबी दूरी तय की है।
अभिभावकों के लिए भी यह बदलाव भरोसे का आधार बना है। उनके बच्चों को आधुनिक शैक्षिक संसाधनों के लिए गांव से दूर नहीं जाना पड़ रहा।
उत्तर प्रदेश सरकार की ग्राम पंचायत डिजिटल लाइब्रेरी पहल का परिणाम धरातल पर है। ग्राम पंचायत सचिवालय अब प्रशासनिक सेवाओं के साथ ज्ञान और तकनीक के केंद्र के रूप में भी नई भूमिका निभा रहे हैं।
खसहा मोहम्मदपुर की यह डिजिटल लाइब्रेरी बदलाव की जीवंत तस्वीर है।
गांव बदल रहा है, पढ़ाई का परिवेश बदल रहा है और ज्ञान की रोशनी अब बच्चों के द्वार तक पहुंच रही है।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 5, 2026
वहीं, प्रदेश के 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब के माध्यम से शिक्षा को तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इसके उलट 2012-16 के दौरान पर्याप्त सरकारी निधि होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिल सकी थी। शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता से लेकर उनकी पहुंच तक उत्तर प्रदेश ने लंबी दूरी तय की है।
ग्राम पंचायत सचिवालय केवल प्रशासनिक सेवाओं के केंद्र नहीं रह गए हैं। वे ज्ञान, तकनीक और डिजिटल शिक्षा के स्थानीय केंद्र के रूप में भी नई भूमिका निभा रहे हैं। खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी इसी बदलती तस्वीर का उदाहरण है जहां गांव की चौखट पर ही आधुनिक शिक्षा और अवसर दस्तक दे रहे हैं।






