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यूपी : नौ साल में बेरोजगारी के कलंक से मिली मुक्ति…एमएसएमई सेक्टर बना रोजगार का सबसे बड़ा सहारा

तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को मिला काम, 96 लाख यूनिट्स के साथ प्रदेश देश में अव्वल

लखनऊ, 23 मार्च 2026:

उत्तर प्रदेश में बीते 9 सालों में रोजगार और कारोबार के मौके तेजी से बढ़े हैं। सरकार की नीतियों का असर अब जमीन पर साफ दिख रहा है, खासकर एमएसएमई सेक्टर में। छोटे और मंझोले उद्योग अब सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लाखों युवाओं की रोजी-रोटी का जरिया बन चुके हैं।

2017 से पहले बेरोजगारी का कलंक ढो रहे उत्तर प्रदेश के भीतर 9 सालों में रोजगार का दायरा काफी बढ़ा है। छोटे उद्योग, निवेश और सरकारी योजनाओं के मेल से अब युवाओं के सामने पहले से ज्यादा मौके नजर आ रहे हैं। एक नजर डालें तो पता चलता है कि प्रदेश में आज एमएसएमई यूनिट्स की संख्या 96 लाख के पार पहुंच चुकी है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। इन्हीं के जरिए 3 करोड़ 11 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। यही वजह है कि अब यह सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनता जा रहा है।

सरकार ने इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए फाइनेंस, ट्रेनिंग और मार्केट की सहूलियत देने पर जोर दिया। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना को भी इससे जोड़ा गया, जिससे छोटे कारोबारियों को नई पहचान और बाजार मिला। इसका असर यह हुआ कि गांव और छोटे शहरों में भी काम के मौके बढ़े और लोगों का रुझान अपने ही इलाके में काम करने की तरफ हुआ।

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उधर, निवेश के मोर्चे पर भी बड़ी तस्वीर सामने आई है। पिछले 9 साल में प्रदेश में करीब 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। इनमें से करीब 15 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुके हैं, जिनसे लगभग 60 लाख रोजगार के मौके तैयार हुए हैं। बड़े उद्योगों के आने से औद्योगिक माहौल मजबूत हुआ और इसका सीधा फायदा युवाओं को मिला।

युवाओं को नौकरी के साथ-साथ खुद का काम शुरू करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत अब तक 38 हजार से ज्यादा युवाओं को मदद मिली है और 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की मार्जिन मनी दी गई है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत भी हजारों लोगों को आर्थिक सहायता मिली, जिससे करीब 2.6 लाख लोगों को रोजगार मिला।

इसके अलावा, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों को भी सहारा मिला है। करीब 4 लाख 20 हजार से ज्यादा कारीगरों को इस योजना का फायदा मिला, जिससे उनका हुनर और काम दोनों आगे बढ़े।

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