EducationLucknow CityUttar Pradesh

डिजिटल क्रांति की ओर UP के सरकारी स्कूल : अब स्मार्ट क्लास से पढ़ाई बनेगी और आसान, शिक्षकों को मास्टर ट्रेनिंग

​समग्र शिक्षा अभियान के तहत हर ब्लॉक में तैयार हुए मास्टर ट्रेनर, 30 अगस्त तक प्रदेश के सभी शिक्षकों को दिया जाएगा डिजिटल शिक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण

लखनऊ, 6 अगस्त 2026:

यूपी के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की तस्वीर अब तेजी से बदलने वाली है। राज्य सरकार स्कूलों में मौजूद स्मार्ट क्लास, आईसीटी (ICT) लैब और डिजिटल संसाधनों का शत-प्रतिशत व प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण अभियान शुरू कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल उपकरणों को केवल कमरों में बंद न रखकर उन्हें हर दिन की पढ़ाई का एक सहज और रोचक हिस्सा बनाना है।

​इस बड़े अभियान की कमान संभालते हुए महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने प्रदेश के सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

​दो चरणों में तैयार हुए मास्टर ट्रेनर

ये भी पढ़ें:

योजना को धरातल पर उतारने के लिए हर विकासखंड (ब्लॉक) से एक-एक शिक्षक को संदर्भदाता यानी ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में चुना गया है। इन शिक्षकों का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण दो चरणों में पूरा किया जा चुका है। पहला चरण 27 से 29 जुलाई और दूसरा चरण 4 से 6 अगस्त तक आयोजित हुआ। अब यही मास्टर ट्रेनर अपने-अपने ब्लॉकों में जाकर अन्य शिक्षकों को दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण देंगे। हर बैच में अधिकतम 50 शिक्षक शामिल होंगे। सभी जनपदों को यह ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण 30 अगस्त तक पूरा करने की सख्त हिदायत दी गई है।

​क्लास को रोचक बनाएंगे डिजिटल संसाधन

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को स्मार्ट क्लास, इंटरैक्टिव डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और ई-कंटेंट के प्रयोग का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। साथ ही, ‘एनबीडीआईयूपी’ (NBDIUP) पोर्टल पर मौजूद डिजिटल बोर्ड मैनुअल, इंस्टॉलेशन वीडियो और ट्यूटोरियल का उपयोग सिखाया जाएगा, जिससे वे कठिन विषयों को दृश्यात्मक (Visual) और मनोरंजक तरीके से पढ़ा सकें। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
up-govt-schools-smart-class-ict-lab-teacher-training-monika-rani (2)

​तकनीकी समस्याओं का तुरंत होगा समाधान

प्रशिक्षण को केवल किताबों और थ्योरी तक सीमित नहीं रखा गया है। शिक्षकों को एस्केलेशन मैट्रिक्स, प्रेरणा मॉड्यूल और ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ के बारे में भी बताया जा रहा है, ताकि डिजिटल उपकरणों में कोई खराबी आने पर उसका तुरंत निस्तारण हो सके। इसके लिए विभिन्न सेवा प्रदाताओं और अधिकारियों के संपर्क विवरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।

​ऑनलाइन निगरानी और प्री-पोस्ट टेस्ट

प्रशिक्षण कितना प्रभावी रहा, इसका मूल्यांकन करने के लिए हर शिक्षक का प्री-टेस्ट और पोस्ट-टेस्ट होगा। राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा ऑनलाइन पर्यवेक्षण के साथ-साथ बीएसए, डायट, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला समन्वयक नियमित मॉनिटरिंग करेंगे। ​बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के अनुसार, सरकार का लक्ष्य सिर्फ स्मार्ट क्लास बनाना नहीं, बल्कि हर शिक्षक को डिजिटल तकनीक में पूरी तरह निपुण बनाना है ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा मिल सके।

ये भी पढ़ें  बरेली में अधूरे पुल से गिरकर तीन युवाओं मौत का जिम्मेदार कौन? गूगल मैप या प्रशासन

Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button