Uttar Pradesh

बीसी सखी योजना में UP नंबर-1: 40 हजार महिलाएं गांव-गांव पहुंचा रहीं बैंकिंग सेवा, हर माह 10-15 हजार तक कमाई

प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी प्रशिक्षित महिलाएं माइक्रो एटीएम और डिजिटल उपकरणों की मदद से गांवों में कैश निकासी, जमा, आधार आधारित भुगतान सहित कई बैंकिंग सेवाएं घर के पास ही करा रहीं उपलब्ध

लखनऊ, 16 मार्च 2026:

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और गांवों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तर प्रदेश बीसी सखी योजना के तहत देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश दूसरे और राजस्थान तीसरे स्थान पर है। योगी सरकार के प्रयासों से यह योजना प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनती जा रही है।

प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 40 हजार महिलाएं बीसी सखी के रूप में गांव-गांव काम कर रही हैं। ये महिलाएं ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ खुद भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस योजना के माध्यम से महिलाएं औसतन 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं। कई बीसी सखियां बैंकिंग लेन-देन पर मिलने वाले कमीशन के जरिए महीने में 40 से 50 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित बीसी सखी (बिजनेस कॉरेस्पांडेंट सखी) पहल ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण का प्रभावी मॉडल बन रही है। प्रशिक्षित महिलाएं माइक्रो एटीएम और डिजिटल उपकरणों की मदद से गांवों में कैश निकासी, जमा, आधार आधारित भुगतान सहित कई बैंकिंग सेवाएं घर के पास ही उपलब्ध करा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच तेजी से बढ़ी है।

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राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला के अनुसार लखनऊ, प्रयागराज, सुल्तानपुर सहित कई जिलों में महिलाएं इस योजना के जरिए आर्थिक स्वावलंबन की नई मिसाल कायम कर रही हैं। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को गांवों में तैनात किया जाता है, जिससे ग्रामीणों को बैंक की सेवाएं अपने घर के पास ही मिलने लगी हैं।

लखनऊ की अनीता पाल इस योजना के जरिए आत्मनिर्भरता का उदाहरण बनकर उभरी हैं। उन्हें हर महीने निश्चित आय के साथ करीब 50 हजार रुपये तक कमीशन भी मिल रहा है। इसी तरह सुल्तानपुर की प्रियंका मौर्य भी बीसी सखी के रूप में काम करते हुए परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं और अतिरिक्त कमीशन से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।

बीसी सखी कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ-साथ बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और केनरा बैंक भी इस पहल में सहयोग के लिए आगे आए हैं। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ महिलाओं के समावेशी विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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