
लखनऊ, 18 अगस्त 2026:
आलू की अच्छी पैदावार के बाद बाजार में भाव गिरने की चिंता से जूझने वाले यूपी के किसानों के लिए योगी सरकार ने बड़ा आर्थिक सुरक्षा कवच तैयार किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में आलू उत्पादकों को बाजार भाव में गिरावट, शीतगृह में भंडारण की लागत और गुणवत्तापूर्ण बीज की कीमत से राहत देने के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। इन योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उद्यान विभाग ने नया ऑनलाइन पोर्टल potato.uphorticulture.in भी शुरू किया है।
प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने उद्यान भवन में पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना की है। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि का प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति आलू की उत्पादन लागत निर्धारित करेगी। किसानों को निर्धारित उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत अथवा उत्पादन लागत और बिक्री दर के अंतर, दोनों में जो राशि कम होगी उतनी अनुदान राशि दी जाएगी। एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तथा प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल आलू पर अनुदान अनुमन्य होगा। सरकार के मुताबिक इससे करीब 12 से 14 लाख किसान लाभान्वित होंगे।
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पात्र किसानों को अनुदान की राशि आधार-सीडेड डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी। योजना की क्रियान्वयन अवधि 1 जनवरी से 15 अप्रैल तथा 1 जुलाई से 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है। लाभ के लिए क्रेता-विक्रेता सौदा प्रपत्र अनिवार्य होगा। किसान मंडी, उपमंडी, शीतगृह परिसर या अपने प्रक्षेत्र पर आलू बेचकर योजना का लाभ ले सकेंगे।
शीतगृह में आलू रखने पर भी राहत
सरकार ने निजी शीतगृहों में आलू भंडारित करने वाले किसानों को भी बड़ी राहत दी है। प्रदेश के 2363 निजी शीतगृहों में 173.03 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है। भंडारण प्रभार में छूट के लिए 1000 करोड़ रुपये की योजना लागू की गई है जिसमें 100 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि का प्रावधान है। इसके तहत किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान मिलेगा। एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इससे 15 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।

बेहतर बीज पर भी सरकार देगी छूट
किसानों को नवीन और उच्च गुणवत्ता वाली आलू प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराने के लिए 5 करोड़ रुपये की बीज विक्रय दर छूट योजना भी लागू की गई है। विभागीय आलू बीज खरीदने पर किसानों को अधिकतम 1000 रुपये प्रति क्विंटल की छूट मिलेगी। इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत कम होगी और 15 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार किसानों की आय, हित और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। तीनों योजनाओं को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ने का उद्देश्य प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और सुगम बनाना है। इससे आलू किसानों को एक साथ भाव गिरने, भंडारण खर्च और गुणवत्तापूर्ण बीज की लागत तीनों मोर्चों पर सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा, उद्यान निदेशक बीपी राम समेत विभागीय अधिकारी और आलू उत्पादक किसान मौजूद रहे।





