
लखनऊ, 25 सितंबर 2026:
पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, भेदभाव रहित पीएलआई योजना समेत विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मियों का आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल से पहले शुक्रवार शाम लखनऊ में बैंककर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया।
स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर जुटे बैंककर्मी आक्रोशित नजर आए। कर्मचारी नेताओं ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक करने का ऐलान किया। बैंक नेता एसके संगतानी और लक्ष्मण सिंह ने कहा कि कर्मचारियों की एकता और संघर्षशीलता से सरकार घबराई हुई है और इसी वजह से कथित तौर पर कई तरह के निर्णय लिए जा रहे हैं। संदीप सिंह और वीके माथुर ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधन को अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर और तबादले का भय दिखाने संबंधी निर्देश दिए जा रहे हैं।
अशोक अग्रवाल और सचिन केसरवानी ने सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार से बैंककर्मियों को सावधान रहने की अपील की। वहीं शकील अहमद, राकेश पाण्डेय और धनंजय सिंह ने दावा किया कि रिजर्व बैंक समेत कई विभागों के संगठन भी बैंक कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।
आंदोलन के बीच रविवार (27 सितंबर) को बैंक खोलने का मुद्दा भी गरमा गया है। बैंक नेताओं ने बताया कि एसबीआई और पीएनबी समेत कई बैंकों के प्रबंधन ने रविवार को शाखाएं खोलने का परिपत्र जारी किया है। कर्मचारी संगठनों ने इसे द्विपक्षीय समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए विरोध किया है। बैंककर्मियों ने ऐसे आदेशों का अनुपालन नहीं करने की बात कही।

दरअसल, 26 और 27 सितंबर को अवकाश के बाद 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल प्रस्तावित है। यानी लगातार पांच दिन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। ग्राहकों को होने वाली असुविधा को देखते हुए केंद्र सरकार ने 27 सितंबर (रविवार) को सभी सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को सामान्य रूप से खोलने का फैसला किया है।
UFBU के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बाद भी मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। ऐसे में बैंकिंग व्यवस्था को लेकर आने वाले दिनों में टकराव और बढ़ने के संकेत हैं।






