लखनऊ, 1 मई 2026:
प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स और पार्ट टाइम कर्मियों के लिए कामकाज के नियमों में बड़ा बदलाव लागू किया है। मजदूर दिवस पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि अब साप्ताहिक अवकाश, तय कार्य घंटे और समय पर वेतन देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मकसद कर्मचारियों के शोषण पर रोक लगाना और उन्हें बुनियादी सुरक्षा देना है।
सप्ताह में एक दिन छुट्टी अनिवार्य
सरकार के मुताबिक नए लेबर कोड और आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए पूरी व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाया गया है। अब कर्मचारियों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा दी गई है, जिससे मनमानी की गुंजाइश कम होगी। नए नियमों के तहत किसी भी कर्मचारी से लगातार सातों दिन काम नहीं लिया जा सकेगा। छह दिन काम के बाद एक दिन का सवेतनिक अवकाश देना जरूरी होगा। रोजाना काम के घंटे 8 से 9 तय किए गए हैं। इससे ज्यादा काम कराने पर ओवरटाइम देना होगा।
छुट्टियों का नया ढांचा तय
कर्मचारियों के लिए छुट्टियों का पूरा सिस्टम स्पष्ट किया गया है। साल में 10 दिन आकस्मिक अवकाश मिलेगा। छह महीने की सेवा पूरी होने पर 15 दिन की बीमारी की छुट्टी दी जाएगी। इसके अलावा 15 दिन अर्जित अवकाश रहेगा, जिसे आगे के लिए जोड़ा भी जा सकेगा। महिला कर्मियों के लिए मैटरनिटी लीव के नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कही गई है।
वेतन व्यवस्था में पारदर्शिता
सरकार ने सैलरी स्ट्रक्चर में भी बदलाव किया है। कुल वेतन का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा मूल वेतन होगा, जिससे पीएफ और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी होगी। अब हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच वेतन सीधे बैंक खाते में भेजना अनिवार्य रहेगा।
आउटसोर्स सेवा निगम से बदलाव
एक अप्रैल 2026 से लागू आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए बिचौलियों की भूमिका कम करने की कोशिश की जा रही है। नए मानकों के तहत अकुशल श्रमिकों के लिए करीब 11 हजार रुपये से अधिक और कुशल श्रमिकों के लिए 13,500 रुपये से ज्यादा न्यूनतम वेतन तय किया गया है। साथ ही समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत को लागू करने पर जोर दिया गया है। सरकार का कहना है कि ये बदलाव आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थिरता और सम्मान देने की दिशा में अहम कदम हैं।






