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अब क्रिमिनल्स की खैर नहीं! UP पुलिस के 94 अफसर बने Scientific जांच के एक्सपर्ट

यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में छह सप्ताह का 'क्राइम सीन मैनेजमेंट' प्रशिक्षण पूरा, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण और आधुनिक विवेचना तकनीकों में अफसर हुए प्रशिक्षित

लखनऊ, 25 जुलाई 2026:

यूपी में अपराध की जांच को और अधिक वैज्ञानिक, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार के विजन को नया बल मिला है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में ‘क्राइम सीन मैनेजमेंट’ कोर्स के पांचवें बैच का छह सप्ताह का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो गया। इस प्रशिक्षण में प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जनपदों से आए 94 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अपराध स्थल पर साक्ष्यों का वैज्ञानिक संरक्षण, आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग और विवेचना को वैज्ञानिक आधार प्रदान करना रहा जिससे कोर्ट में मजबूत पैरवी के जरिए दोषियों को सजा दिलाने की दर बढ़ाई जा सके।

फॉरेंसिक से मजबूत होगी अदालत में पैरवी

समापन समारोह में मुख्य अतिथि यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व डीजीपी डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। डीएनए, फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण अपराधियों की पहचान और सफल विवेचना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि अपराध स्थल से साक्ष्य उच्च गुणवत्ता के साथ सुरक्षित किए जाएं तो उन्हें अदालत में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।

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प्रशिक्षित अधिकारी जिलों में निभाएं ‘ट्रेनर ऑफ ट्रेनर्स’ की भूमिका

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डॉ. प्रशांत कुमार ने प्रशिक्षित अधिकारियों से अपने-अपने जिलों में ‘ट्रेनर ऑफ ट्रेनर्स’ (टीओटी) की भूमिका निभाने और अन्य पुलिसकर्मियों को भी आधुनिक फॉरेंसिक जांच तकनीकों का प्रशिक्षण देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने विश्वस्तरीय फॉरेंसिक शिक्षा और विशेषज्ञ तैयार करने के उद्देश्य से यूपीएसआईएफएस की स्थापना की है, जो प्रदेश की पुलिसिंग को नई दिशा दे रहा है।

कानून और विज्ञान का संगम ही फॉरेंसिक साइंस

यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि कानून और विज्ञान का संगम ही फॉरेंसिक विज्ञान है। न्याय की पहली मजबूत सीढ़ी पुलिस की वैज्ञानिक जांच से ही तैयार होती है। डीआईजी हेमराज मीना ने प्रशिक्षण के सफल संचालन के लिए सभी प्रतिभागियों और प्रशिक्षकों का आभार जताया।

उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को क्राइम सीन मैनेजमेंट के साथ साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। समारोह में उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. पोरवी सिंह, विवेक कुमार, डॉ. सपना, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. शाश्या मिश्र, डॉ. स्वप्निल, डॉ. पलक सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद थे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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