
लखनऊ, 3 अगस्त 2026:
हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष के बीच सावन के पहले सोमवार पर पूरा प्रदेश शिवभक्ति में डूबा है। रविवार देर रात से ही प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का पहुंचना शुरू हो गया। हाथों में गंगाजल और कंधों पर सजी कांवड़ लिए लाखों शिवभक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, मेरठ, बागपत, कानपुर, आगरा और संभल समेत कई जिलों में सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और यातायात के व्यापक इंतजाम किए।

मनकामेश्वर मंदिर में रात से ही लग गई श्रद्धालुओं की कतार
यूपी की राजधानी लखनऊ शिवालयों में सावन के पहले सोमवार को भोर से ही भक्तों की कतारें लग गईं। बरसात के बीच शिवालयों में हर-हर, जय-जय के घोष गूंज उठे। प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर, बुद्धेश्वर महादेव मंदिर सहित कई शिवालयों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रात से ही श्रद्धालु मंदिर के बाहर कतार में लग गए थे। सुबह मंगला आरती के बाद बाबा का विशेष शृंगार किया गया। श्रद्धालु गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शहद और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक किया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।
बागपत के प्राचीन श्री परशुरामेश्वर (पुरा महादेव) मंदिर में रविवार रात से ही कांवड़ियों का तांता लग गया। वहीं मेरठ के औघड़नाथ और सिद्धपीठ बाबा बिल्वेश्वरनाथ महादेव मंदिर में सोमवार तड़के चार बजे मंगला आरती के बाद विशेष श्रृंगार के साथ जलाभिषेक शुरू हुआ। मंदिर के पुजारी हरीशचंद जोशी के अनुसार मंगला आरती के बाद भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया गया और उसके बाद जलाभिषेक आरंभ हो गया।
कई प्रमुख शिवालयों का कायाकल्प श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना
वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम को इस अवसर पर भव्य रूप से सजाया गया है। यहां बाबा का ‘श्री शंकर स्वरूप’ श्रृंगार किया जाएगा और श्रद्धालुओं व कांवड़ियों का पुष्प वर्षा से स्वागत होगा। गोरखपुर में पर्यटन विकास योजनाओं के तहत मानसरोवर, मुक्तेश्वरनाथ, मुंजेश्वरनाथ, पितेश्वरनाथ और मोटेश्वर महादेव सहित कई प्रमुख शिवालयों का कायाकल्प श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
संभल के पातालेश्वर शिव मंदिर में ये है अनूठी परंपरा
वहीं संभल जिले की चन्दौसी तहसील स्थित 118 वर्ष पुराने प्राचीन पातालेश्वर शिव मंदिर में भी विशेष तैयारियां की गईं हैं। यहां सावन भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। इस मंदिर की पहचान भोलेनाथ को झाड़ू चढ़ाने की अनूठी परंपरा है। इसके बारे में मान्यता है कि इससे शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

प्रयागराज-वाराणसी हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए सुरक्षित
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वाराणसी में एंटी ड्रोन प्रणाली और जियो फेंसिंग के साथ शहर को पांच जोन और 15 सेक्टरों में बांटकर करीब पांच हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए। प्रयागराज-वाराणसी हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए सुरक्षित रखी गई। मेरठ और बागपत में पीएसी, आरएएफ और 500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी।

कानपुर का परमट स्थित ऐतिहासिक श्री आनंदेश्वर मंदिर बना श्रद्धालुओं की आस्था केंद्र है। यहां सुबह से ही भोले के भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। कानपुर के आनंदेश्वर मंदिर में हर सेवादार और कर्मचारियों के लिए जूना अखाड़ा तथा पुलिस की मुहर वाला फोटो पास अनिवार्य किया गया है। जाजमऊ के सिद्धनाथ, नवाबगंज के जागेश्वर महादेव और पीरोड के बनखंडेश्वर मंदिरों में भी विशेष सुरक्षा और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। संभल में रूट डायवर्जन लागू करने के साथ छह पुलिस चौकियां चौबीसों घंटे सक्रिय किया गया। है।
गंगा-यमुना का पवित्र जल लेकर काशी रवाना हुईं महिला शिवभक्त
प्रयागराज में बड़ी संख्या में महिला शिवभक्त गंगा-यमुना का पवित्र जल लेकर काशी के लिए रवाना हुईं। उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए घाटों पर महिला पुलिस बल तथा आपदा सखियों की विशेष तैनाती की गई है। शिवभक्ति, परंपरा और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच सावन का पहला सोमवार पूरे प्रदेश में आस्था, उत्साह और भक्ति के विराट संगम का साक्षी बना है।






