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गोबर से गैस, खाद और कमाई… UP में शुरू होगा देश का सबसे बड़ा गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी अभियान

हर जिले के 1000 घरों में लगेंगे मिनी बायोगैस प्लांट, आईआईटी दिल्ली बनेगा तकनीकी साझेदार, 15 से अधिक कंपनियां जुड़ेंगी अभियान से, ग्रामीणों को मिलेगा अनुदान, रोजगार, सस्ती ऊर्जा और जैविक खेती को मिलेगा नया बल

लखनऊ, 19 जुलाई 2026:

यूपी सरकार गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी का अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश के हर जिले में एक हजार से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे। योजना में स्थायी (फिक्स) और पोर्टेबल दोनों प्रकार के प्लांट शामिल होंगे। ग्रामीणों को प्लांट लगाने के लिए अनुदान देने की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। इससे अधिक से अधिक परिवार इस अभियान से जुड़ सकेंगे।

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका मजबूत तकनीकी और औद्योगिक सहयोग है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार आईआईटी दिल्ली इस परियोजना का तकनीकी साझेदार होगा। संस्थान प्लांट की डिजाइन, संचालन, रखरखाव और युवाओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभाएगा। वहीं बायोगैस और ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में कार्यरत 15 से अधिक अग्रणी कंपनियों ने भी परियोजना के क्रियान्वयन और विस्तार में रुचि दिखाई है। इससे आधुनिक तकनीक और निजी क्षेत्र का अनुभव सीधे गांवों तक पहुंचेगा।

सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश की गोशालाओं को भविष्य में ‘रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी और ऑर्गेनिक खाद का उत्पादन किया जाएगा। आगे चलकर कार्बन क्रेडिट जैसे नए आय स्रोतों को भी इस मॉडल से जोड़ा जाएगा। इससे गो आधारित उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय, ऊर्जा और रोजगार का स्थायी आधार बन सकेंगे।

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इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू युवाओं के लिए रोजगार सृजन भी है। आईआईटी दिल्ली के प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को बायोगैस प्लांट की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे प्रदेश में ग्रीन टेक्नीशियन की नई पीढ़ी तैयार होगी। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए भी स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

मिनी बायोगैस प्लांट से तैयार गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में होगा। इससे ग्रामीण परिवारों की एलपीजी पर निर्भरता और रसोई गैस का खर्च कम होगा। वहीं, प्लांट से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में खेतों में उपयोग होगी। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

गो सेवा आयोग का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश के गांवों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी। आने वाले वर्षों में यह मॉडल उत्तर प्रदेश को देश की गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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