लखनऊ, 22 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य सरकार ने “कौशल दिशा” नाम से एक डिजिटल पोर्टल विकसित किया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल की कमी को दूर करना और युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार करना है। यह पोर्टल प्रदेश की व्यापक और समावेशी कौशल विकास नीति का मजबूत डिजिटल माध्यम बनकर सामने आया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से सीधा कौशल प्रशिक्षण
“कौशल दिशा” पोर्टल सरकार की उस निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत युवाओं को कौशल, सम्मानजनक आजीविका और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म तकनीक और नवाचार के जरिए कौशल विकास को नई दिशा देता है और उत्तर प्रदेश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में मदद करता है।
ग्रामीण युवाओं के लिए आसान और निःशुल्क सुविधा
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि “कौशल दिशा” एक ऑनलाइन कौशल शिक्षा मंच है। इसमें सरल पंजीकरण, सेल्फ लर्निंग, ऑनलाइन मूल्यांकन और प्रमाणन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह पोर्टल दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 1.0 के तहत चयनित शीर्ष 10 प्रमुख सेक्टरों में ऑनलाइन प्रशिक्षण देता है। इनमें आईटी आईटीईएस, पर्यटन और आतिथ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, परिधान और रेडीमेड गारमेंट, होम फर्निशिंग, रिटेल और लॉजिस्टिक्स जैसे रोजगार से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं। इसके जरिए ग्रामीण गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ेगी।
महिलाओं के लिए घर बैठे प्रशिक्षण का अवसर
“कौशल दिशा” पोर्टल महिलाओं के लिए भी विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा। कई महिलाएं सामाजिक या पारिवारिक कारणों से प्रशिक्षण केंद्रों तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में स्मार्टफोन और इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे प्रशिक्षण लेकर प्रमाणन हासिल करने की सुविधा उन्हें सशक्त बनाएगी। यह पहल योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति को और मजबूती देती है।
तकनीक से मजबूत होगा कौशल तंत्र
यह पोर्टल उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कौशल विकास को तकनीक और नवाचार से जोड़ा जा रहा है। इसका लक्ष्य राज्य में एक मजबूत, समावेशी और भविष्य के अनुरूप कौशल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार दोनों के बेहतर अवसर मिल सकें।






