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अमेरिका छोड़कर गांव में बनाया Fish Farming का बड़ा मॉडल, अन्य किसानों की भी बदली किस्मत

करीब नौ साल तक अमेरिका में इंजीनियर के तौर पर काम किया, फिर भारत लौटकर रायबरेली में 10 हेक्टेयर में 23 तालाब तैयार किए, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से लिया अनुदान, हर साल 500 से 600 टन मछली का उत्पादन, अब Fish Hub और Training Center बनाने की तैयारी, ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के रास्ते खुलने की उम्मीद

लखनऊ/रायबरेली, 14 जुलाई 2026:

अमेरिका में अच्छी नौकरी और बेहतर करियर छोड़कर गांव लौटे एक इंजीनियर ने रायबरेली में ऐसा काम शुरू किया, जो आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। बस्ती के रहने वाले सुजीत चौधरी ने IT सेक्टर का अनुभव खेती से जुड़े कारोबार में लगाया और सरकारी योजना का फायदा लेकर कुछ ही वर्षों में Fish Farming का बड़ा मॉडल तैयार कर दिया। आज उनके फार्म में हर साल 500 से 600 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। उनके साथ 50 से ज्यादा किसान जुड़े हैं और आने वाले समय में यहां Fish Hub और Training Center भी तैयार करने की योजना है।

इंजीनियरिंग से अमेरिका तक का सफर

सुजीत चौधरी ने वर्ष 2005 में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू की। दो साल बाद उन्हें कंपनी की ओर से अमेरिका भेजा गया। वहां उन्होंने करीब नौ साल तक अलग-अलग तकनीकी परियोजनाओं पर काम किया। विदेश में काम करते हुए उन्होंने आधुनिक प्रबंधन, योजना बनाने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने का अनुभव हासिल किया। वर्ष 2016 में भारत लौटने के बाद उन्होंने नोएडा में सॉफ्टवेयर से जुड़ा अपना काम शुरू किया, लेकिन मन में हमेशा कुछ ऐसा करने की इच्छा थी जिससे गांव और किसानों को भी फायदा मिल सके।

कोरोना के दौर में लिया बड़ा फैसला

कोरोना महामारी के दौरान जब लोगों का ध्यान गांव और कृषि आधारित रोजगार की ओर बढ़ा, तब सुजीत ने भी अपने अगले कदम पर गंभीरता से काम शुरू किया। उन्होंने कई क्षेत्रों का अध्ययन किया और आखिरकार Fish Farming को चुना। उन्होंने मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों, बाजार की मांग, उत्पादन लागत और सप्लाई चेन पर लंबे समय तक काम किया। पूरी तैयारी के बाद रायबरेली में बड़े स्तर पर निवेश करने का फैसला लिया।

10 हेक्टेयर में खड़ा किया बड़ा प्रोजेक्ट

वर्ष 2019 में सुजीत ने रायबरेली के महराजगंज क्षेत्र के बल्ला गांव में करीब 10 हेक्टेयर जमीन लीज पर ली। यहां उन्होंने चरणबद्ध तरीके से 23 तालाब तैयार किए। शुरुआत में उत्पादन सीमित था, लेकिन आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और लगातार निगरानी की वजह से उत्पादन तेजी से बढ़ा। आज यह प्रोजेक्ट व्यावसायिक स्तर पर संचालित हो रहा है। यहां हर साल करीब 500 से 600 टन मछली का उत्पादन किया जाता है। तैयार मछली की सप्लाई अलग-अलग बाजारों तक की जाती है और कारोबार लगातार बढ़ रहा है।
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किसानों को भी बनाया साझेदार

सुजीत का मॉडल सिर्फ अपने कारोबार तक सीमित नहीं है। उन्होंने आसपास के 50 से ज्यादा किसानों को भी अपने साथ जोड़ा है। किसानों को तालाब तैयार करने, मछली पालन की तकनीक, चारा प्रबंधन, उत्पादन बढ़ाने और बाजार तक पहुंचने की जानकारी दी जाती है। इस मॉडल से जुड़े कई किसानों की आमदनी पहले की तुलना में बढ़ी है। सुजीत का कहना है कि अगर सही तकनीक और बाजार की जानकारी मिल जाए तो मत्स्य पालन गांवों में रोजगार का बड़ा जरिया बन सकता है।

बिचौलियों की जगह सीधे बाजार से जुड़ने पर जोर

मत्स्य पालन में सबसे बड़ी चुनौती बेहतर दाम मिलना होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सुजीत ने बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे ग्राहकों और खरीदारों से संपर्क बढ़ाया। इससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने लगा। वह सामान्य मछलियों के साथ खारे पानी में तैयार होने वाली समुद्री झींगा के उत्पादन पर भी काम कर रहे हैं। इससे उनके कारोबार का दायरा लगातार बढ़ रहा है और नए बाजार भी मिल रहे हैं।

सरकारी मदद से कारोबार को मिली रफ्तार

कारोबार के विस्तार के दौरान उन्हें वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 8.50 लाख रुपये का अनुदान मिला। इस राशि का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने और जरूरी सुविधाएं विकसित करने में किया गया। सुजीत मानते हैं कि शुरुआती दौर में मिली यह आर्थिक मदद कारोबार को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित हुई, लेकिन सफलता की असली कुंजी लगातार मेहनत, सही योजना और बाजार की समझ रही।

अब Fish Hub और Training Center की तैयारी

सुजीत अब अपने प्रोजेक्ट को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। उनकी योजना आधुनिक Fish Hub स्थापित करने की है। यहां मछली की गुणवत्ता जांच के लिए लैब, प्रोसेसिंग की सुविधाएं और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जाएगा। इस Training Center में स्थानीय युवाओं और किसानों को आधुनिक Fish Farming की तकनीक सिखाई जाएगी। इससे वे खुद का कारोबार शुरू कर सकेंगे और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।

बदलाव देखने गांव आते हैं लोग

रायबरेली में तैयार हुआ यह मॉडल अब आसपास के किसानों के लिए भी सीखने का केंद्र बनता जा रहा है। यहां लोग सिर्फ मछली पालन देखने नहीं आते, बल्कि यह समझने भी आते हैं कि तकनीक, बेहतर प्रबंधन और सही बाजार रणनीति के जरिए गांव में रहकर भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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