देहरादून, 7 जून 2026:
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तराखंड ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में हुए BRICS Disaster Risk Reduction (DRR) वर्किंग ग्रुप की तकनीकी बैठक में राज्य के आपदा प्रबंधन मॉडल की खुलकर सराहना की गई।
उत्तराखंड की ओर से सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में विकसित आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, क्षमता विकास, तकनीकी नवाचार और प्रभावी प्रतिक्रिया सिस्टम पर प्रेजेंटेशन दिया

इस दौरान बताया गया कि उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों, हिमालयी परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलों से जुड़े खतरों, सड़क अवरोधों और तीर्थयात्राओं के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया गया। साथ ही बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र और राहत-बचाव व्यवस्था की कार्यप्रणाली भी साझा की गई।
बैठक में तीन साल पूर्व हुए सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली आपदा में संकट के समय किए गए प्रबंधन कार्यों को उत्तराखंड के सफल मॉडल के तौर पर पेश किया गया। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने इन अभियानों को कठिन भौगोलिक हालात में तकनीक, प्रशासनिक समन्वय, धैर्य और मानवीय संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण बताया।
सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पूर्व चेतावनी प्रणाली, जोखिम न्यूनीकरण उपायों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल की भी सराहना हुई। वहीं एसडीआरएफ की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी आपदा प्रबंधन का मजबूत मॉडल बताया गया।
अर्पण यदुवंशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता निर्माण और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है। वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को कम करने की दिशा में काम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में आपदा प्रबंधन केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं हो सकता। इसके लिए पहले से तैयारी, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, प्रशिक्षित बलों की उपलब्धता और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था जरूरी है।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के निर्देशन में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग, डेटा एनालिटिक्स और पूर्व चेतावनी तंत्र आपदा जोखिम कम करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भविष्य की चुनौतियों से निपटने में तकनीक आधारित समाधान और ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे।

बैठक की प्रमुख उपलब्धियों में ब्रिक्स देशों के बीच आपदा जोखिम न्यूनीकरण को लेकर सहयोग बढ़ाने, तकनीकी नवाचारों को प्रोत्साहन देने, सामुदायिक स्तर पर तैयारी मजबूत करने और वैश्विक आपदा प्रबंधन सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति शामिल रही।
तीन दिन चली इस बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया समेत 11 ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ व नीति निर्माता शामिल हुए। बैठक में आपदा जोखिम कम करने, मजबूत बुनियादी ढांचे, सामुदायिक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए वित्तीय व्यवस्थाओं पर अनुभव साझा किए गए।






