
वाराणसी, 4 अक्टूबर 2026:
यूपी के वाराणसी में RPF और Anti Human Trafficking टीम ने ट्रेन चेकिंग के दौरान 9 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया है। बच्चे असम और बिहार से अलग-अलग जगहों पर काम करने के लिए ले जाए जा रहे थे। पूछताछ में तीन युवकों की भूमिका सामने आई, जिनके साथ बच्चे सफर कर रहे थे। पुलिस ने मानव तस्करी का मामला मानते हुए FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
ट्रेन के जनरल कोच में मिले बच्चे
Operation Aahat के तहत सेक्शन चेकिंग के दौरान ट्रेन संख्या 15668 UP गांधीधाम एक्सप्रेस को पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से वाराणसी जंक्शन के बीच चेक किया गया। ट्रेन के पीछे वाले जनरल कोचों में कुछ नाबालिग बच्चे दिखाई दिए। टीम ने उनसे बातचीत की तो अलग-अलग समूहों में काम के लिए ले जाए जाने की जानकारी सामने आई। बच्चों को ट्रेन से उतारकर वाराणसी जंक्शन लाया गया, जहां उनसे विस्तार से पूछताछ की गई।
प्लाई फैक्ट्री में काम के लिए जा रहे थे 3 बच्चे
पूछताछ में सामने आया कि असम के उदालगुड़ी जिले के तीन नाबालिग बच्चों को 20 वर्षीय मुन्तदुर अली अपने साथ कोकराझार से गांधीधाम ले जा रहा था। बच्चों के मुताबिक उन्हें मुन्नालाल प्लाई फैक्ट्री में काम दिलाने की बात कही गई थी। मुन्तदुर अली ने बच्चों के टिकट का खर्च उठाया था। इसके अलावा काम के लिए उन्हें 1500 रुपये एडवांस दिए गए थे। पूछताछ के दौरान मुन्तदुर अली ने बच्चों के टिकट कराने और एडवांस पैसे देने की बात स्वीकार की।
अयोध्या में ठेकेदार के यहां काम का दावा
बिहार के अररिया जिले के तीन नाबालिग बच्चे भी टीम को मिले। उन्होंने बताया कि वे 20 वर्षीय मोहम्मद आमीन के साथ कटिहार रेलवे स्टेशन से अयोध्या जा रहे थे। उन्हें ठेकेदार आलम के यहां काम करने के लिए ले जाया जा रहा था। बच्चों के मुताबिक ठेकेदार ने आमीन को 1000 रुपये एडवांस दिए थे। पूछताछ में आमीन ने भी बच्चों के टिकट कराने और काम के एवज में एडवांस रकम दिए जाने की बात स्वीकार की।
15 हजार रुपये वेतन का वादा
असम के बोंगईगांव जिले के तीन अन्य नाबालिग बच्चों ने बताया कि वे 20 वर्षीय फोरिजुल शेख के साथ कोकराझार से गांधीधाम जा रहे थे। उन्हें पटना-गांधीधाम की जिरगन कंपनी में काम करने के लिए ले जाया जा रहा था। बच्चों ने बताया कि कंपनी की तरफ से फोरिजुल को टिकट के पैसे दिए गए थे। फोरिजुल ने टिकट कराकर उन्हें साथ लिया था। बच्चों को काम के बदले 15 हजार रुपये वेतन देने की बात कही गई थी। फोरिजुल ने भी पूछताछ में बच्चों के टिकट कराने की बात स्वीकार की।
तीनों युवकों के पास मिले टिकट और मोबाइल
जांच के दौरान आमीन के पास कटिहार से लखनऊ के टिकट, एक बैग, कपड़े, खाने का सामान और मोबाइल मिला। उसके पास 580 रुपये नकद भी मिले। मुन्तदुर अली के पास कोकराझार से गांधीधाम के कई टिकट, एक बैग, कपड़े, मोबाइल और 520 रुपये नकद मिले। फोरिजुल शेख के पास भी कई टिकट मिले, जिनमें असम के गोलपाड़ा से गांधीधाम के टिकट शामिल थे। उसके पास 900 रुपये नकद, एक बैग, कपड़े और मोबाइल मिला। टीम ने मौके की वीडियोग्राफी भी कराई।
मानव तस्करी की आशंका पर FIR
RPF टीम ने सभी 9 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित प्रक्रिया के तहत सुपुर्द किया। पुलिस के मुताबिक बच्चों को काम के लिए ले जाने, टिकट कराने और एडवांस रकम दिए जाने से मामला मानव तस्करी से जुड़ा प्रतीत हुआ। मामले में मुन्तदुर अली, मोहम्मद आमीन और फोरिजुल शेख के खिलाफ FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बच्चों से जुड़े मामले में उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।






