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यूजीसी के नए नियमों पर ‘सुप्रीम’ रोक का स्वागत… जानें क्या बोले मायावती व अखिलेश

बसपा ने कहा नए नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेना चाहिए था वहीं सपा बोली बात नियमों की नहीं नियत की होती है

लखनऊ, 29 अगस्त 2026:

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के फैसले का राजनीतिक हलकों में स्वागत किया गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती तथा समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अदालत के फैसले को उचित बताया है।

गौरतलब है कि यूजीसी के नए नियमों के विरोध में छात्र लगातार आंदोलन कर रहे थे। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के लागू होने पर रोक लगा दी। इस फैसले के बाद बसपा और सपा के शीर्ष नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं।

बसपा प्रमुख मायावती ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नए नियम लागू किए गए, उनसे देश में सामाजिक तनाव का माहौल पैदा हो गया। ऐसे हालात को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाने का फैसला उचित है। उन्होंने कहा कि यदि यूजीसी नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेती और जांच समितियों में ‘नेचुरल जस्टिस’ के तहत सभी वर्गों, विशेषकर वंचित समाज को उचित प्रतिनिधित्व देती, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि सच्चा न्याय वह है, जिसमें किसी के साथ अन्याय न हो। यही काम न्यायालय करता है। उन्होंने कहा कि कानून की भाषा और भावना दोनों स्पष्ट होनी चाहिए। बात केवल नियमों की नहीं, नीयत की भी होती है। अखिलेश ने आगे कहा कि न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय, न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो और न ही किसी के साथ नाइंसाफी-यही न्याय का मूल भाव है।

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