
लखनऊ/हाथरस, 20 अगस्त 2026:
बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजिटल दुनिया के बीच हाथरस पुलिस ने बच्चों को कागज और कलम से जोड़ने की एक सराहनीय पहल शुरू की है। यह कोशिश बच्चों को बेहतर लिखना सिखाने के साथ ही उन्हें अपने मन की बात खुलकर कहने का हौसला भी देगी। हाथरस के एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा की पहल ‘पंख स्नेल लेटर राइटिंग’ के तहत हाथरस सदर क्षेत्र स्थित श्री सीएलआरएन सेकसरिया इंटर कॉलेज में बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। एसपी स्वयं कार्यक्रम में पहुंचे और बच्चों से सीधे संवाद कर उन्हें नियमित पत्र एवं रचनात्मक लेखन के लिए प्रेरित किया।

कागज पर लिखे शब्दों में छिपी होती हैं बच्चों की भावनाएं : सिन्हा
पहल का मकसद साफ है। मोबाइल की स्क्रीन से कुछ समय बच्चों को दूर कर उन्हें कागज और कलम की दुनिया में वापस लाना। इस माध्यम से बच्चों की लेखन क्षमता, कल्पनाशक्ति, सोचने-समझने की क्षमता और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के कौशल को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। हाथरस के एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने कहा कि कागज पर लिखे शब्द महज शब्द नहीं होते अपितु उनमें बच्चे के विचार, भावनाएं, सपने और भविष्य की कल्पनाएं छिपी होती हैं।
‘पंख’ के तहत बच्चों को दिए गए व्यापक विषय
बच्चों को अलग-अलग सामाजिक और जीवन से जुड़े विषयों पर पत्र एवं लेख लिखने के लिए प्रेरित किया गया। इनमें आधुनिक दौर में मूलभूत जीवन मूल्यों की वापसी, दादा-दादी और नाना-नानी से जुड़ाव, भारतीय होने पर गर्व, समय प्रबंधन, माता-पिता के समय की जरूरत, भविष्य के सपने, राष्ट्र निर्माण में बच्चों की भूमिका, छोटी बचत की आदत और ‘शिक्षा केवल परीक्षा के लिए नहीं, जीवन निर्माण के लिए’ जैसे विषय शामिल हैं।

स्क्रीन टाइम से स्मार्ट टाइम, खेल, किताबें और प्रकृति
इसके साथ ही ‘स्क्रीन टाइम से स्मार्ट टाइम’, ‘खेल, किताबें और प्रकृति’, बच्चों में अनुशासन और जिम्मेदारी, सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण तथा नीति निर्माण में बच्चों की आवाज जैसे विषयों के जरिए उन्हें अपने आसपास की दुनिया को समझने और उस पर अपनी राय रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
बच्चों से बोले SP- रोज कुछ समय केवल कागज और कलम के लिए करें निर्धारित
एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बच्चों से कहा कि वे रोज कुछ समय केवल कागज और कलम के लिए निर्धारित करें। दिनभर का अनुभव, कोई नया विचार, किताब से मिली सीख या भविष्य का सपना, कुछ भी लिखने की आदत डालें। उनका कहना था कि नियमित लेखन बच्चों के भीतर कल्पना, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की ताकत को मजबूत करता है।
बच्चों ने साझा किए विचार, लिया नियमित लेखन का संकल्प
कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साह के साथ अपने विचार साझा किए और नियमित लेखन का संकल्प लिया। ‘पंख’ पहल का संदेश यही है कि बच्चों की कलम को उड़ान मिले और उनके विचारों को ऐसी दिशा मिले.जो आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और समाज दोनों को नई रोशनी दे।






