लखनऊ, 13 मार्च 2026:
प्रदेश में गोकशी और गोतस्करी पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार की ओर से सख्त कार्रवाई जारी है। विशेष अभियान के तहत अब तक गोकशी से जुड़े 14,182 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 35,924 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
सरकार की ओर से इस अपराध पर नियंत्रण के लिए वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण कानून में संशोधन करते हुए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण संशोधन अध्यादेश लागू किया गया था। इसके बाद से पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में गोकशी और अवैध पशु वध से जुड़े नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ सामान्य मुकदमों के साथ कड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई है। कुल 35,924 आरोपियों में से 13,793 के खिलाफ गुंडा एक्ट लगाया गया है। वहीं 178 आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई। इसके अलावा 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
कार्रवाई के दौरान आर्थिक मोर्चे पर भी अपराधियों को निशाने पर लिया गया है। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। कई मामलों में अवैध कमाई से खरीदी गई जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियां भी कुर्क की गईं।
गोकशी और गोतस्करी को रोकने के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों की ओर से खुफिया निगरानी बढ़ाई गई है और जिलास्तर पर टास्क फोर्स बनाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। सीमावर्ती जिलों में सतर्कता बढ़ाने के साथ रात में पुलिस गश्त भी तेज की गई है। पशु परिवहन से जुड़े मामलों की भी विशेष निगरानी की जा रही है।
इसके साथ ही अवैध बूचड़खानों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया है। प्रशासन का कहना है कि लगातार की जा रही कार्रवाई से अवैध पशु वध और गोतस्करी से जुड़े कई संगठित गिरोहों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है।
उत्तर प्रदेश गोवध निवारण संशोधन अध्यादेश 2020 के तहत नियमों को सख्त किया गया है। इसके तहत गोहत्या के मामले में अधिकतम 10 वर्ष तक कठोर कारावास और 3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं गोवंश के अंगभंग करने पर 7 वर्ष तक की सजा और 3 लाख रुपये तक जुर्माना निर्धारित है।





