लखनऊ, 12 जून 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार सहारा समूह से वापस ली गई जमीन के इस्तेमाल को लेकर नई योजना पर तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार इस जमीन पर अत्याधुनिक विधानसभा परिसर बनाने की संभावनाएं तलाश रही है। इसके लिए फिजिबिलिटी स्टडी कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें देश की सात बड़ी कंसल्टेंसी और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों ने रुचि दिखाई है।
सरकार का मानना है कि मौजूदा विधानसभा भवन भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सीमित होता जा रहा है। परिसीमन के बाद विधायकों की संख्या बढ़ने की संभावना है, ऐसे में बैठक कक्ष, दफ्तर, पार्किंग और दूसरी सुविधाओं के विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है।
सहारा समूह की यह जमीन शहर के अहम हिस्से में स्थित है और पर्याप्त क्षेत्रफल भी रखती है। इसी वजह से इसे नए विधानसभा परिसर के लिए उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है। हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सबसे पहले यह जांच होगी कि जमीन पर तकनीकी, कानूनी और पर्यावरणीय दृष्टि से विधानसभा भवन का निर्माण संभव है या नहीं।

फिजिबिलिटी स्टडी के दौरान मिट्टी की गुणवत्ता, ट्रैफिक दबाव, पर्यावरण पर असर, निर्माण लागत और दूसरी जरूरी बातों का आकलन किया जाएगा। इस काम के लिए उत्तर प्रदेश, दिल्ली और दक्षिण भारत की सात कंपनियों ने प्रस्ताव दिए हैं। इन फर्मों को बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स और कंसल्टेंसी का अनुभव बताया जा रहा है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक या दो कंपनियों को अध्ययन का जिम्मा सौंपा जाएगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि जल्द ही इच्छुक कंपनियां अपना प्रेजेंटेशन देंगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।






