
लखनऊ, 21 जून 2026:
Ram Mandir Donation Scam की जांच कर रही तीन सदस्यीय SIT छह दिन की पड़ताल पूरी करने के बाद अयोध्या से लखनऊ लौट आई है। सोमवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार क्या कदम उठाती है।

बता दें कि समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को सोशल मीडिया मंच एक्स पर राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उन्होंने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेताओं ने भी सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया।
इसी मामले को लेकर पूर्व लेखा प्रभारी और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े महिपाल सिंह ने दावा किया कि वर्ष 2021 से ही चढ़ावे में हो रही गड़बड़ी की जानकारी ट्रस्ट के जिम्मेदार लोगों को दी थी, लेकिन बाद में उन्हें ही वहां से हटा दिया गया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज हटाने का भी आरोप लगाया। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पूर्व सांसद विनय कटियार समेत कई संतों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से जांच का आग्रह किया गया, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की। आईजी लखनऊ रेंज किरन एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन को भी टीम में शामिल किया गया।
15 जून से अयोध्या में डेरा डाले एसआईटी ने करीब दर्जनों लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान चढ़ावे के हिसाब-किताब, रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था, cctv फुटेज और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कई खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सोना-चांदी के चढ़ावे के ब्योरे को लेकर भी सवाल उठे हैं।

एसआईटी ने शुरुआती जांच के दौरान सिर्फ चढ़ावे तक खुद को सीमित नहीं रखा। जांच का दायरा बढ़ाते हुए सामानों की खरीद, निर्माण कार्यों, ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले गए। कई लोगों से अभिलेख मांगे गए और अलग-अलग स्तर पर पूछताछ की गई। शनिवार को अंतिम दिन एसआईटी टीम ने ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान तीनों ने अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी को लेकर एक-दूसरे की ओर इशारा किया। खास बात ये रही कि राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने व्यक्तिगत तौर पर चंपत राय को क्लीन चिट दी लेकिन ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
फिलहाल एसआईटी के लौटने के बाद अब योगी सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर टिकी है। दो दिन पहले अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बयानबाजी से बचने की सलाह देते हुए कहा था कि एसआईटी जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सोमवार को प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार की ओर से बड़े फैसले, ट्रस्ट में बदलाव या प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।






