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Lucknow Fire Tragedy : बाराबंकी के दो, सीतापुर का एक बेटा नहीं लौटा, आग में बुझ गए तीन घरों के चिराग

अलीगंज स्थित Head Hoppers Animation and Gaming Zone वाली बिल्डिंग में लगी आग में तीन परिवारों पर टूटा दुख का पहाड़, बाराबंकी के मोहम्मद अम्मार और शहजान के साथ सीतापुर के आदित्य श्रीवास्तव की भी मौत हुई। तीनों युवा पढ़ाई और हुनर के सहारे भविष्य संवारने की कोशिश में लगे थे।

बाराबंकी/सीतापुर, 23 जून 2026:

लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुई भीषण आग की घटना ने पड़ोसी जिलों बाराबंकी और सीतापुर के तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में बाराबंकी के मोहम्मद अम्मार और शहजान के साथ सीतापुर के बिसवां निवासी आदित्य श्रीवास्तव की भी मौत हो गई। तीनों युवा अपने करियर को बेहतर बनाने के लिए लखनऊ में रहकर पढ़ाई के साथ ट्रेनिंग ले रहे थे।

बाराबंकी के लखपेड़ाबाग फोरलेन निवासी 23 वर्षीय मोहम्मद अम्मार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। परिवार को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं। हादसे की खबर मिलते ही घर में मातम पसर गया। परिजन लखनऊ पहुंच गए और अस्पताल में शव की पहचान की।
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इसी तरह फतेहपुर कस्बे के सट्टी बाजार मोहल्ले से ताल्लुक रखने वाले 22 वर्षीय शहजान हाजी मोहम्मद इमरान के इकलौते बेटे थे। परिवार लखनऊ के गुडंबा इलाके में रह रहा था। शहजान अपनी तीन विवाहित बहनों के इकलौते भाई थे। जिस बिल्डिंग में आग लगी, वहीं संचालित Head Hoppers Studio में वह प्रशिक्षण ले रहे थे। आग के दौरान वह अंदर ही फंस गए। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बेटे का शव देखकर मां बेसुध हो गईं, जबकि बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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सीतापुर जिले के बिसवां के कैथी टोला निवासी 24 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव भी इस हादसे का शिकार हो गए। उनके पिता आलोक श्रीवास्तव बिसवां तहसील में वकालत करते हैं, जबकि मां कल्पना श्रीवास्तव प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र हैं। आदित्य लखनऊ में पढ़ाई के साथ उसी बिल्डिंग के एक प्रतिष्ठान में काम भी करते थे। आग लगने के समय वह वहीं मौजूद थे। धुएं के कारण उनकी हालत बिगड़ गई और अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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परिवारों के मुताबिक तीनों युवा मेहनती और मिलनसार स्वभाव के थे। उनकी मौत से न सिर्फ घरों में सन्नाटा पसरा है, बल्कि मोहल्लों में भी शोक का माहौल है। लोग शव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। इस बात को लेकर आक्रोश भी है कि इमारतें और उनका सिस्टम इतना असुरक्षित क्यों है कि इंसानी जिंदगी आग में झुलस जाए और उसे कोई रास्ता सुझाई न दे।

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