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बस्ता तैयार है, यूनिफॉर्म भी… फिर स्कूल जाने से क्यों डरते हैं कुछ बच्चे

पढ़ाई का दबाव, परीक्षा का तनाव और बुलिंग जैसे कारण बन रहे बच्चों के लिए स्कूल जाने के डर की वजह, कई बच्चे अपनी परेशानी शब्दों में नहीं बल्कि अपने व्यवहार से करते हैं जाहिर

न्यूज डेस्क, 28 जून 2026:

स्कूल बच्चों की जिंदगी का वह हिस्सा होता है जहां वे अनुशासन, टीमवर्क और जिंदगी के कई जरूरी सबक सीखते हैं। लेकिन कई बच्चे ऐसे भी होते हैं जिनके लिए स्कूल का नाम सुनना ही तनाव, घबराहट और डर का कारण बन जाता है। अक्सर माता-पिता इसे जिद, आलस या पढ़ाई से बचने का तरीका मान लेते हैं जबकि कई मामलों में इसके पीछे एक वास्तविक मानसिक और भावनात्मक समस्या छिपी होती है जिसे विशेषज्ञ ‘स्कूल फोबिया’ या ‘स्कूल एंग्जायटी’ कहते हैं।

आंकड़ों में दिख रहा बढ़ते तनाव का असर

बच्चों में बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर हुए कई अध्ययन चिंता बढ़ाने वाले हैं। भारत में 3.8 लाख से अधिक छात्रों पर किए गए एक राष्ट्रीय सर्वे में 81 प्रतिशत छात्रों ने पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम को अपनी चिंता और तनाव का सबसे बड़ा कारण बताया। सर्वे में शामिल बड़ी संख्या में छात्रों ने स्वीकार किया कि अकादमिक दबाव उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।

वहीं दक्षिण भारत के 550 स्कूली छात्रों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में करीब 17 प्रतिशत किशोरों में स्कूल फोबिया के लक्षण पाए गए जबकि आधे से अधिक छात्रों में किसी न किसी प्रकार की चिंता संबंधी समस्या मौजूद थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या पहले की तुलना में अब अधिक दिखाई दे रही है और इसके पीछे बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और प्रदर्शन का दबाव बड़ी वजह है।

आखिर बच्चे स्कूल से डरते क्यों है

आज के समय में कई बच्चों पर कम उम्र से ही बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव रहता है। परीक्षा, होमवर्क, कोचिंग और प्रतियोगिता का बोझ कई बार बच्चों के मन में डर पैदा कर देता है। अगर किसी बच्चे को उसके क्लासमेट्स बार-बार चिढ़ाते हैं, उसका मजाक उड़ाते हैं या उसे अलग-थलग महसूस कराया जाता है तो वह स्कूल जाने से बचने की कोशिश कर सकता है

कुछ बच्चों के लिए कक्षा में डांट पड़ना या सबके सामने गलती बताई जाना बेहद तनावपूर्ण अनुभव हो सकता है। विशेषकर छोटे बच्चों में परिवार से अलग होने का डर काफी सामान्य होता है। इसे सेपरेशन एंग्जायटी कहा जाता है। स्कूल बदलना, नए दोस्त बनाना या नई कक्षा में जाना भी बच्चों में असुरक्षा और घबराहट पैदा कर सकता है।
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कैसे पहचानें बच्चे के स्कूल जाने का डर

विशेषज्ञों के अनुसार स्कूल फोबिया से जूझ रहे बच्चों में कुछ सामान्य लक्षण देखने को मिलते हैं। ऐसे बच्चे अक्सर स्कूल जाने के समय पेट दर्द, सिर दर्द या तबीयत खराब होने की शिकायत करते हैं। स्कूल का जिक्र होते ही वे घबराहट, रोने या चिड़चिड़ेपन का व्यवहार दिखा सकते हैं। इसके अलावा पढ़ाई और दोस्तों के साथ मेलजोल में उनकी रुचि कम होने लगती है और वे बार-बार स्कूल न जाने के बहाने तलाशने लगते हैं।

ऐसे में ये उपाय करें पेरेंट्स

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बच्चा स्कूल जाने को लेकर डर या तनाव महसूस कर रहा है तो उसकी भावनाओं को समझना और उसकी बात ध्यान से सुनना बेहद जरूरी है। कई बार बच्चे अपनी परेशानी को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। बच्चों को किसी भी तरह की दिक्कत है या उनका स्कूल में किसी भी तरह का शोषण हो रहा है तो ऐसे में उनका व्यवहार ही उनकी मानसिक स्थिति का संकेत देता है। ऐसे में माता-पिता को बच्चे से खुलकर बातचीत करनी चाहिए। उसकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए और स्कूल व शिक्षकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए।

पेरेंट्स को बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे उन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहती है या बढ़ने लगती है तो किसी काउंसलर या मनोवैज्ञानिक की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है।

स्कूल डर नहीं, सीखने और सपनों की जगह बने

बच्चे का स्कूल से डरना सिर्फ उसकी पढ़ाई का नहीं बल्कि उसके आत्मविश्वास और मानसिक विकास का भी सवाल है। ऐसे में जरूरी है कि परिवार, स्कूल और समाज मिलकर ऐसा माहौल तैयार करें जहां बच्चे स्कूल को बोझ नहीं बल्कि अपने सपनों की उड़ान का पहला पड़ाव समझें। क्योंकि जब बच्चा मुस्कुराते हुए स्कूल जाता है तभी वह खुलकर सीखता है, बढ़ता है और अपने भविष्य की मजबूत नींव रखता है।

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