योगेंद्र मलिक
अल्मोड़ा, 18 जून 2026:
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने युवाओं से बड़े सपने देखने का आह्वान करते हुए कहा कि देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाकर आगे बढ़ना ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का रास्ता है। उन्होंने कहा कि अमृत पीढ़ी ही विकसित भारत 2047 के संकल्प को जमीन पर उतारने की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।
राज्यपाल गुरुवार को सोबन सिंह जीना यूनिवर्सिटी अल्मोड़ा के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उपाधि हासिल करने वाले छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी।
अल्मोड़ा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कसार देवी, गोलू देवता, बाबा नीब करौरी और मां नंदा-सुनंदा से जुड़े इस क्षेत्र की पहचान को देश के लिए प्रेरणादायी बताया। साथ ही राष्ट्रवादी नेता स्वर्गीय सोबन सिंह जीना को याद करते हुए कहा कि उनके नाम पर बना विश्वविद्यालय शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।
उन्होंने National Education Policy 2020 के मुताबिक विश्वविद्यालय की पहलों की सराहना की। कहा कि पारंपरिक ज्ञान, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संस्थान लगातार काम कर रहा है। आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र, हैप्पीनेस लैब, हरेला पीठ और लक्ष्मी देवी टम्टा केंद्र जैसी पहल को उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अहम बताया।

राज्यपाल ने कहा कि रिसर्च केवल किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज की असली जरूरतों और समस्याओं के समाधान का जरिया बननी चाहिए। उन्होंने पर्वतीय कृषि, जड़ी-बूटी, जल संरक्षण और स्थानीय चुनौतियों से जुड़े विषयों पर ज्यादा शोध करने की जरूरत बताई। साथ ही साइबर सुरक्षा और Artificial Intelligence जैसे आधुनिक क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की पहल को समय की मांग बताया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेटियां हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। दीक्षांत समारोहों में बड़ी संख्या में छात्राओं का पदक हासिल करना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है।
युवाओं से संवाद करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे केवल विकसित भारत के गवाह नहीं, बल्कि उसके सारथी भी हैं। उन्होंने युवाओं से नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी बनने की अपील की। जैविक खेती, जड़ी-बूटी, पर्यटन और स्टार्टअप सेक्टर में मौजूद संभावनाओं का जिक्र करते हुए
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में तरक्की से पलायन जैसी चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है।
राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को उत्तराखंड का प्राकृतिक और आध्यात्मिक दायित्व बताते हुए हिमालय, नदियों और जंगलों को बचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। समारोह में कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, शिक्षक, विशिष्ट अतिथि, अभिभावक मौजूद रहे।






