
लखनऊ/पीलीभीत, 29 जून 2026:
यूपी में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम के विकास के बाद अब जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन विभाग ने पीलीभीत के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए 1.04 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। प्रथम चरण में 78 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के पास स्थित गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। लगभग 960 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर सहित कई जनपदों को जीवन देती हुई गाजीपुर में गंगा नदी में समाहित हो जाती है।
उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत ढांचे का निर्माण कराया जाएगा। करीब 48.69 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल, 13.44 लाख रुपये से आधुनिक शौचालय ब्लॉक तथा 9.45 लाख रुपये से शेड का निर्माण होगा। इसके अलावा इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सोलर आधारित सुविधाएं और अन्य यात्री सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को सौंपी गई है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने गोमती नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था। वहीं नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती नदी के तट पर ही मानी जाती है। यही कारण है कि गोमती नदी सनातन आस्था और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती है।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में प्रदेश अपनी प्राकृतिक और धार्मिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मां गोमती का उद्गम स्थल एक भौगोलिक स्थान के साथ सनातन परंपरा और लोकआस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उत्तर प्रदेश के धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।






