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हैप्पी मूड, हैप्पी लाइफ की चाबी… कोई केमिकल लोचा नहीं हैप्पी वाला हार्मोन है

मोटिवेशन, फोकस और खुशी से जुड़ा है 'डोपामाइन', मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल, तनाव और कम नींद से बिगड़ सकता है जिंदगी का संतुलन

न्यूज डेस्क, 29 जून 2026:

क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी दिन आप बिना वजह बेहद उत्साहित और ऊर्जा से भरे रहते हैं जबकि कुछ दिनों में मामूली काम भी पहाड़ जैसा लगने लगता है? इसके पीछे सिर्फ आपका मूड या परिस्थितियां नहीं बल्कि आपके दिमाग में काम करने वाले रसायनों की भी बड़ी भूमिका होती है। इन्हीं में से एक है डोपामाइन।
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डोपामाइन को अक्सर लोग ‘हैप्पी हार्मोन’ कहते हैं लेकिन असल में यह एक महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर है जो दिमाग की कोशिकाओं के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कराता है। इसकी जिम्मेदारी केवल खुशी महसूस कराना नहीं है बल्कि यही आपकी प्रेरणा, एकाग्रता, सीखने की क्षमता, याददाश्त और लक्ष्य हासिल करने की इच्छा को भी प्रभावित करता है। जब आप कोई उपलब्धि हासिल करते हैं, नई चीज सीखते हैं, पसंदीदा भोजन का आनंद लेते हैं या किसी लक्ष्य तक पहुंचते हैं तब दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम सक्रिय होता है और डोपामाइन इसमें अहम भूमिका निभाता है।

कम डोपामाइन स्तर की ऐसे करें पहचान

अगर पिछले कुछ समय से सुबह बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता, काम में रुचि कम हो गई है, छोटी-छोटी जिम्मेदारियां भी बोझ लगने लगी हैं या पहले जिन चीजों से खुशी मिलती थी उनमें अब उत्साह महसूस नहीं होता तो इसे केवल थकान या खराब मूड मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षण कई बार डोपामाइन सिस्टम के असंतुलन से भी जुड़े हो सकते हैं जिससे व्यक्ति की ऊर्जा, उत्साह और काम करने की इच्छा प्रभावित होने लगती है।

आधुनिक जीवनशैली भी बन सकती है वजह

घंटों मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन के सामने बिताना, सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहना, पर्याप्त नींद न लेना, जंक फूड का अधिक सेवन और लगातार तनाव में रहना दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि कई लोग बिना किसी स्पष्ट वजह के भी थकान और उदासी महसूस करने लगते हैं।

अच्छी बात यह है कि समाधान मुश्किल नहीं

डोपामाइन को संतुलित रखने के लिए किसी चमत्कारी दवा की नहीं बल्कि रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतों की जरूरत होती है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद, संतुलित भोजन, सुबह की धूप और ध्यान जैसी आदतें दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं।

हालांकि डोपामाइन सीधे भोजन से नहीं मिलता लेकिन हमारा शरीर इसे टायरोसीन नाम के अमीनो एसिड की मदद से बनाता है। ऐसे में अंडा, दूध, दही, पनीर, सोयाबीन और कद्दू के बीज जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।

अच्छी नींद और सुबह की धूप क्यों है जरूरी

नींद केवल शरीर को आराम नहीं देती बल्कि इसी दौरान दिमाग खुद को रिपेयर करता है और न्यूरोट्रांसमीटर सिस्टम को संतुलित बनाए रखता है। लगातार नींद पूरी न होने पर डोपामाइन रिसेप्टर्स की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है जिसका असर फोकस, मूड और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ सकता है।

इसके अलावा सुबह की हल्की धूप और प्रकृति के बीच कुछ समय बिताना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। इससे तनाव कम करने वाले तंत्र सक्रिय होते हैं और व्यक्ति खुद को अधिक शांत, सकारात्मक और ऊर्जावान महसूस कर सकता है कई बार खुश रहने का रास्ता बड़ी चीजों से नहीं बल्कि रोज की छोटी और अच्छी आदतों से होकर गुजरता है।

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