
लखनऊ, 2 जुलाई 2026:
यूपी निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार के साथ वैश्विक उच्च शिक्षा का भी मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। इसकी ताजा मिसाल लखनऊ विश्वविद्यालय है। यहां शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए रिकॉर्ड 77 देशों से 3421 अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने एडमिशन के लिए आवेदन किया है। पिछले सत्र में यह संख्या 2083 थी। महज एक वर्ष में 1338 आवेदनों की बढ़ोतरी के साथ विश्वविद्यालय ने 64 प्रतिशत की ऐतिहासिक छलांग लगाई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक इस बार बांग्लादेश, नेपाल, नाइजीरिया, सूडान और तंजानिया से सबसे अधिक आवेदन आए हैं। वहीं जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देशों से भी छात्रों की बढ़ती रुचि विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई ऊंचाई दे रही है।

पाठ्यक्रमवार आंकड़ों के अनुसार स्नातक (यूजी) कार्यक्रमों के लिए 2552, स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के लिए 595 और विभिन्न विषयों में पीएचडी के लिए 274 विदेशी विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। शोध और नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ता रुझान विश्वविद्यालय की मजबूत अकादमिक गुणवत्ता का संकेत माना जा रहा है।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय का कहना है कि प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कैंपस, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, शोध संस्कृति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। यही वजह है कि प्रदेश के विश्वविद्यालय अब दुनिया भर के छात्रों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय आवेदनों में रिकॉर्ड वृद्धि विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों और छात्र-अनुकूल माहौल का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विकसित बहुविषयक शिक्षा, वैश्विक अनुसंधान के अवसर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को व्यापक सराहना मिल रही है।
विश्वविद्यालय ने विदेशी विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के साथ प्रवेश प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और वीजा संबंधी औपचारिकताओं को समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से पूरा करने की तैयारियां तेज कर दी हैं।






