
लखनऊ, 7 जुलाई 2026:
यूपी में गो संरक्षण को ग्रामीण विकास और स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने की योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नई रफ्तार पकड़ने जा रही है। अब आईआईटी दिल्ली की तकनीकी विशेषज्ञता के सहयोग से प्रदेश में बड़े पैमाने पर बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य हर जिले में एक मॉडल विलेज विकसित करना है जहां गोबर से ऊर्जा, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती का समग्र मॉडल तैयार होगा।
किसानों को मिलेगी गोबर से तैयार जैविक खाद
इस अभियान की शुरुआत झांसी के ग्राम पलींदा से की गई है। यहां पहले चरण में 18 बायोगैस प्लांट स्थापित किए गए हैं। लक्ष्य पूरे गांव के हर घर तक बायोगैस पहुंचाकर इसे प्राकृतिक कृषि ग्राम के रूप में विकसित करना है। इससे ग्रामीणों को स्वच्छ ईंधन मिलेगा। किसानों को गोबर से तैयार उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद उपलब्ध होगी।
आईआईटी के बायोगैस डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर की टीम संभाल रही जिम्मेदारी
इस अभियान को तकनीकी रूप से सफल बनाने की जिम्मेदारी आईआईटी दिल्ली के बायोगैस डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय के नेतृत्व वाली विशेषज्ञ टीम संभाल रही है। टीम में रत्नेश तिवारी, अक्षय श्रीवास्तव, चिंतन दवे और डॉ. मंगाराम शामिल हैं। यह टीम गांवों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना, संचालन, रखरखाव और तकनीकी प्रशिक्षण में सहयोग करेगी जिससे इस मॉडल को पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
रासायनिक खादों पर निर्भरता होगी समाप्त
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि बायोगैस संयंत्रों के विस्तार से गांवों में रासायनिक खादों पर निर्भरता खत्म होगी और किसानों को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण ऑर्गेनिक खाद मिलेगी। इससे रसायन मुक्त कृषि को बढ़ावा मिलेगा और बाजार में सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का यह अभियान गो संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्राकृतिक खेती को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम है। झांसी के पलींदा में शुरू हुआ यह मॉडल जल्द ही प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचेगा और गांव-गांव में स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर उभरती नजर आएगी।






