न्यूज डेस्क, 11 जुलाई 2026:
मूसलाधार बारिश के बीच भी गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जनता दर्शन तय समय पर हुआ। मौसम खराब होने के बावजूद दूर-दराज से पहुंचे लोगों से उन्होंने गोरखनाथ मंदिर परिसर में मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को मौके पर ही जरूरी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है और किसी भी पीड़ित को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
बारिश को देखते हुए इस बार जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सभागार में किया गया। यहां करीब 250 लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री खुद लोगों के बीच जाकर उनसे मिले, उनकी बातें ध्यान से सुनीं और एक-एक प्रकरण पर अधिकारियों से जानकारी लेते हुए जल्द समाधान के निर्देश दिए।
जनता दर्शन के दौरान सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन से जुड़े विवादों की सामने आईं। कई महिलाओं ने आरोप लगाया कि दबंगों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है, जबकि कुछ लोगों ने पारिवारिक बंटवारे और पैतृक संपत्ति के विवाद की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जहां पारिवारिक विवाद हैं वहां पैमाइश और जांच के बाद निष्पक्ष फैसला किया जाए। अगर किसी गरीब की जमीन पर दबंगों ने कब्जा किया है तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और पीड़ित को न्याय मिले।

स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष ध्यान दिया। कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक मदद की मांग लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अस्पतालों से इलाज का इस्टीमेट जल्द तैयार कराकर शासन भेजा जाए ताकि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता बिना देरी उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि इलाज के अभाव में किसी जरूरतमंद की परेशानी नहीं बढ़नी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि हर शिकायत को पूरी संवेदनशीलता के साथ देखा जाए। किसी भी व्यक्ति को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और सभी मामलों का तय समय में पारदर्शी तरीके से निस्तारण कराया जाए। उन्होंने कहा कि आम लोगों की समस्या का समाधान सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में अपनी नियमित दिनचर्या भी निभाई। सबसे पहले उन्होंने गुरु गोरखनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद मंदिर की गोशाला पहुंचे, जहां उन्होंने गोवंश को अपने हाथों से गुड़ और रोटी खिलाई और कुछ समय गोशाला में बिताया।
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