
लखनऊ, 20 जुलाई 2026:
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरा है। मायावती ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट के जरिए सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि देश में लगातार बढ़ती परीक्षा संबंधी अनिश्चितता युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
मायावती ने कहा कि मानसून सत्र शुरू होने के साथ संसद से लेकर सड़कों और दिल्ली के जंतर-मंतर तक विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक हालात को देखते हुए ऐसे टकराव को बेहतर सूझबूझ और संवाद के जरिए टाला जाना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने कहा कि मेडिकल समेत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाओं और राज्यों की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक व अन्य गड़बड़ियों के कारण परीक्षा रद्द होने की आशंका ने युवाओं और बेरोजगारों को लगातार परेशान कर रखा है। विभिन्न स्थानों पर हो रहे आंदोलन और युवाओं का आक्रोश इसी बेचैनी का परिणाम है। उन्होंने सरकारों से परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की।
मायावती ने कहा कि पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों में केवल छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। परीक्षा व्यवस्था से जुड़े उच्च पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी कानूनी सजा मिलनी चाहिए जिससे युवाओं का भविष्य अनिश्चितता और अंधकार में न धकेला जाए।
उन्होंने सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में अच्छे सरकारी स्कूलों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव के कारण निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का तेजी से विस्तार हो रहा है। मायावती के मुताबिक महंगाई के बावजूद परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। युवा आउटसोर्सिंग जैसी अस्थायी नौकरियों से आगे बढ़कर स्थायी और सम्मानजनक रोजगार हासिल करना चाहते हैं।
बसपा प्रमुख ने कहा कि कोचिंग संस्थानों पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर कड़ी निगरानी जरूरी है लेकिन सरकारों को प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकारी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ईमानदारी से ध्यान देना होगा। उन्होंने शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट और गुणवत्ता सुधार को जरूरी बताते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य ही परिवार, समाज, प्रदेश और देश की दिशा तय करेगा।
मायावती ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के उद्देश्यों के अनुरूप शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी और सभ्य भारत के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलनों का समाधान सहानुभूति और संवाद के जरिए करने की अपील की जिससे युवाओं और आम जनता को बार-बार आंदोलन के लिए मजबूर न होना पड़े।






