
बिजनेस डेस्क, 21 जुलाई 2026:
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की कमजोरी का असर मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखा। कारोबार की शुरुआत लगभग सपाट रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी हलचल नहीं दिखी, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली से निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि Q1 Results के दौर में अब पूरे बाजार की बजाय चुनिंदा शेयरों में ज्यादा एक्शन देखने को मिल सकता है।
सपाट शुरुआत, सेंसेक्स हल्का फिसला, निफ्टी मामूली बढ़त पर
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 48.69 अंक यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 77,659.83 अंक पर कारोबार करता दिखा। वहीं एनएसई निफ्टी 13.75 अंक यानी 0.06 फीसदी की बढ़त लेकर 24,252.25 अंक के आसपास बना रहा। निफ्टी 24,250 के अहम स्तर के करीब टिके रहने में सफल रहा।
शुरुआती कारोबार में इन शेयरों पर रहा दबाव
बाजार की सुस्त शुरुआत के बीच कुछ बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक के शेयर करीब एक फीसदी तक टूटे, जबकि फिनटेक कंपनी Paytm के शेयरों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान लगभग एक फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार पर क्यों बढ़ा दबाव
विश्लेषकों के मुताबिक फिलहाल कई घरेलू और वैश्विक वजहें बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है। ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जिससे महंगाई और आयात लागत को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा रही है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से भी मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं।
Global Market का मिला-जुला रुख
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मिश्रित कारोबार देखने को मिला। अमेरिकी बाजार में एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में करीब 0.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
एशियाई बाजारों में जापान का टॉपिक्स इंडेक्स 1.8 फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 करीब 0.1 फीसदी और हांगकांग का Hang Seng 0.6 फीसदी कमजोर रहा। चीन का शंघाई कंपोजिट करीब 0.2 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। यूरोपीय बाजारों में Euro Stoxx 50 फ्यूचर्स में करीब 0.4 फीसदी की कमजोरी रही।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल
बाजार जानकारों का कहना है कि पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे आने के साथ निवेशकों का फोकस अब सेक्टर और Stock Specific Action पर रहेगा। जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती और रुपये में मजबूती नहीं दिखती, तब तक भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार करता रह सकता है।






