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GDP Growth 7.8%: आंकड़े मजबूत, फिर सवाल क्यों? पुराने बेस ईयर से लेकर Nominal GDP तक उठे बड़े सवाल

पहली तिमाही में GDP Growth ने अनुमान को पीछे छोड़ा, Manufacturing की भूमिका पर भी चर्चा, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने Nominal GDP के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए, सरकार ने नई GDP Series की Methodology पर दी सफाई

बिजनेस डेस्क, 3 सितंबर 2026:

भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की GDP Growth दर्ज की है। अप्रैल से जून के बीच की इस Growth ने पिछले साल की इसी तिमाही के 6.9 फीसदी आंकड़े को पीछे छोड़ा है। हालांकि जनवरी से मार्च 2026 की 8.6 फीसदी Growth के मुकाबले इसमें कमी आई है। पहली तिमाही के आंकड़े Bloomberg के 7.3 फीसदी के औसत अनुमान से भी ऊपर रहे। Reserve Bank of India यानी RBI ने इस अवधि के लिए करीब 7 फीसदी Growth का अनुमान लगाया था। सरकार ने जारी आंकड़ों में Manufacturing, Services समेत कई सेक्टरों के प्रदर्शन को Growth की अहम वजह बताया है।

2047 के लक्ष्य के लिए और तेज रफ्तार की जरूरत

GDP के इन आंकड़ों को सरकार की तरफ से अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत के तौर पर पेश किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी Growth के आंकड़ों को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, Supply Chain में दिक्कतों, वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। भारत में Automobile, Mobile Phone, Pharma, Chemicals, Steel समेत कई क्षेत्रों में Manufacturing का विस्तार हुआ है। Semiconductor Industry को भी बड़े स्तर पर विकसित करने की कोशिश चल रही है। इसके बावजूद GDP में Manufacturing की हिस्सेदारी करीब 17 फीसदी है, जबकि सरकार ने इसे 25 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

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7.8% Growth पर सवाल कहां से उठा?

GDP के ताजा आंकड़ों को लेकर सबसे बड़ा सवाल पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने उठाया है। उनका कहना है कि 7.8 फीसदी की Real GDP Growth पहली नजर में मजबूत दिखती है, लेकिन आंकड़ों के पीछे इस्तेमाल किए गए Base से पूरी तस्वीर समझना जरूरी है। गर्ग के मुताबिक पिछले साल की पहली तिमाही के Nominal GDP आंकड़े को नई GDP Series के तहत काफी नीचे संशोधित किया गया है। उनका दावा है कि पिछले साल पहली तिमाही की Current Prices वाली GDP करीब 86 लाख करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में घटाकर करीब 80.3 लाख करोड़ रुपये किया गया।

Nominal GDP को लेकर गर्ग का तर्क

गर्ग का कहना है कि अगर पिछले साल के पुराने Nominal GDP आंकड़े को आधार बनाया जाए तो इस साल की वृद्धि दर मौजूदा आंकड़ों से काफी कम नजर आती। उनके मुताबिक पिछले साल के Base में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी से इस साल की Nominal GDP Growth ज्यादा बड़ी दिखाई दे रही है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पुराने आंकड़े सरकार ने ही जारी किए थे, बाद में नई GDP Series आने के बाद इन्हें संशोधित किया गया। इसलिए उनके मुताबिक इस बदलाव की वजह को ज्यादा विस्तार से समझना जरूरी है। गर्ग का दावा है कि पुराने Current Price Base से तुलना करने पर कुछ सेक्टरों को छोड़कर Growth की तस्वीर उतनी मजबूत नहीं दिखती। उन्होंने Manufacturing को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि पुराने Base से तुलना करने पर Manufacturing की स्थिति कमजोर दिखाई देती है।
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सरकार ने आंकड़ों पर क्या कहा?

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने GDP आंकड़ों पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। उनका कहना है कि फरवरी 2026 में सरकार ने नई GDP Series जारी की थी। इसमें Base Year को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया। सरकार के मुताबिक नई Series तैयार करने से पहले इसकी Methodology पर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, भारतीय अर्थशास्त्रियों समेत संबंधित विशेषज्ञों से चर्चा की गई थी। नई व्यवस्था में पुराने आंकड़ों की खामियों को दूर करने का दावा किया गया है। सरकार ने इसके तहत Back Series भी जारी की थी।

Base Year बदलने से क्या होता है?

GDP की गणना में Base Year एक तरह का Benchmark होता है। इसके जरिए अलग-अलग समय की आर्थिक गतिविधियों, Production, कीमतों, Consumption समेत दूसरे आंकड़ों की तुलना की जाती है। अर्थव्यवस्था में बदलाव के साथ Base Year को अपडेट करना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। भारत में इससे पहले 2011-12, 2004-05, 1999-2000 समेत अलग-अलग वर्षों को Base Year के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। फरवरी 2026 में जारी नई GDP Series में 2022-23 को नया Base Year बनाया गया।
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Constant Price पर तुलना को सरकार ने बताया सही

सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव ने कहा कि अलग-अलग वर्षों की GDP Growth की तुलना करते समय Constant Prices का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मकसद महंगाई के असर को अलग करना है, ताकि वास्तविक Production Growth को समझा जा सके। सरकार का कहना है कि GDP के नए आंकड़ों की तुलना पुरानी Series के आंकड़ों से Current Prices पर करना सही तरीका नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक फरवरी 2026 में जारी Back Series को पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार किया गया था। उसमें कोई मनमाना बदलाव नहीं किया गया।

अनौपचारिक सेक्टर की तस्वीर पर भी सवाल

GDP आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर सिर्फ गर्ग ही सवाल नहीं उठा रहे हैं। अर्थशास्त्री अरुण कुमार भी भारत की GDP Growth को मापने के मौजूदा तरीके पर पहले चिंता जता चुके हैं। उनका मुख्य तर्क है कि भारत की अर्थव्यवस्था में Informal Sector का बड़ा हिस्सा है, जबकि GDP के तिमाही अनुमान में इस्तेमाल होने वाले कई Indicators Formal Economy पर ज्यादा आधारित होते हैं। ऐसे में छोटी कंपनियों, असंगठित कारोबार, स्वरोजगार से जुड़े लोगों की वास्तविक स्थिति पूरी तरह सामने नहीं आ पाती।
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94% कर्मचारियों वाले सेक्टर को कैसे मापा जाए?

अरुण कुमार के मुताबिक देश के करीब 94 फीसदी कर्मचारी असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। इसके बावजूद Quarterly GDP के अनुमान के लिए विमान यातायात, Commercial Vehicle Sales, माल ढुलाई जैसे कई Indicators Formal Economy की गतिविधियों को ज्यादा दिखाते हैं। उनका तर्क है कि अगर Corporate Sector में Growth हो रही हो, लेकिन छोटे कारोबारी, Informal Businesses, Self-Employed लोगों पर आर्थिक दबाव हो तो केवल Formal Sector के संकेतकों के आधार पर पूरी अर्थव्यवस्था की Growth का अनुमान वास्तविक तस्वीर से अलग हो सकता है।

GDP डेटा को बेहतर बनाने के सुझाव

अरुण कुमार ने GDP आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने के लिए Informal Sector के बेहतर Surveys, Census आधारित नए Samples, कीमतों की बेहतर Measurement System समेत कई बदलावों की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि Quarterly GDP, Annual GDP के आंकड़ों के बीच ज्यादा पारदर्शी तालमेल भी जरूरी है।

बेरोजगारी, महंगाई को लेकर विपक्ष का सवाल

GDP Growth के आंकड़ों पर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि GDP Growth के दावे के बीच बेरोजगारी, युवाओं की नौकरी, महंगाई जैसे मुद्दों को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने बेरोजगारी, युवाओं में रोजगार की कमी, जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। खड़गे ने दावा किया कि GDP Growth की तस्वीर को रोजगार की स्थिति से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

Current Account Deficit भी बढ़ा

मजबूत GDP Growth के बीच वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का Current Account Deficit बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गया। यह GDP का करीब 0.5 फीसदी है। पिछले साल की इसी तिमाही में Current Account Deficit 3.4 अरब डॉलर था, जो GDP का 0.4 फीसदी था। इस तरह GDP आंकड़ों को लेकर बहस सिर्फ Growth Rate तक सीमित नहीं है। Nominal GDP, Base Year, Formal-Informal Economy, रोजगार, महंगाई समेत कई आर्थिक Indicators को साथ रखकर तस्वीर समझने की कोशिश की जा रही है।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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