
अनिल निषाद
अयोध्या, 24 जुलाई 2026ः
अयोध्या के मणिराम दास छावनी स्थित धर्म मंडपम में विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में संतों की बैठक हुई। इस दौरान राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण, श्रद्धालुओं की आस्था, फैल रही अफवाहों व रामलला की पूजा व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। बैठक में संत समाज ने कहा कि कुछ व्यक्तियों की कथित गलती के कारण पूरे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, राम मंदिर और संत समाज को बदनाम करना उचित नहीं है। संतों ने चंपत राय को निर्दोष बताया।
संतों ने अयोध्या के पांच प्रमुख संतों को रामलला की पूजा-अर्चना व धार्मिक व्यवस्थाओं से संबंधित धर्म समिति में शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत किया। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा ने कहा कि संत समाज को ट्रस्ट के पदाधिकारियों की ईमानदारी और निष्पक्षता पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है, इसलिए अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी भी प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए।
महंत राजकुमार दास ने कहा कि मामले के आरोपी जेल में हैं और जांच जारी है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया कि नौ सदस्यीय धार्मिक समिति रामलला की पूजा-पद्धति, रामानंदी परंपरा के पालन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सुनिश्चित करने का कार्य करेगी।
बैठक में संत समाज ने चंपत राय को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन रामलला की सेवा को समर्पित किया है और संत समाज उनके साथ मजबूती से खड़ा है। अंत में संत समाज ने देशभर के रामभक्तों से अफवाहों व दुष्प्रचार से दूर रहने, श्रीराम के प्रति अपनी आस्था बनाए रखने और पूरे मामले में एसआईटी की जांच व उसकी अंतिम रिपोर्ट पर भरोसा रखने की अपील की।






