
लखनऊ/सहरानपुर, 24 जुलाई 2026:
सहारनपुर मंडल के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली से जुड़े पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ विभाग की प्रस्तावित व निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाने, धार्मिक विरासत को संवारने और स्थानीय पर्यटन को नई पहचान देने पर विस्तार से चर्चा हुई।
14 परियोजनाओं पर बनी आगे की रणनीति
बैठक में पर्यटन विभाग के कुल 14 प्रस्तावों की समीक्षा की गई। इनमें सहारनपुर के आठ, मुजफ्फरनगर के पांच और शामली का एक प्रस्ताव शामिल है। इन सभी परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 22 करोड़ रुपये है। योजना के तहत मंदिर परिसरों में मल्टीपरपज हॉल, बेहतर Lighting, शौचालय, पेयजल, QR Code वाले Signage, बैठने की व्यवस्था और लैंडस्केपिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मकसद धार्मिक स्थलों को पर्यटन के लिहाज से ज्यादा आकर्षक बनाना है।
रविदास स्थल से सदाशिव महादेव मंदिर तक होंगे काम
सहारनपुर जिले में संत रविदास मंदिर, वाल्मीकि मंदिर, संत रविदास स्थल, ठाकुरद्वारा मंदिर, सतगुरु समनदास स्थल और देवबंद के प्राचीन सदाशिव महादेव मंदिर के विकास पर चर्चा हुई। देवबंद स्थित सदाशिव महादेव मंदिर परियोजना को पहले ही करीब 1.61 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है। इन स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
शुकतीर्थ समेत मुजफ्फरनगर के मंदिरों पर खास जोर
मुजफ्फरनगर के प्रस्तावों में शिव मंदिर, बाबा हरिदास मंदिर, सिद्धपीठ संत रविदास मंदिर और गो माता मंदिर के विकास के साथ शुकतीर्थ को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में आगे बढ़ाने पर खास फोकस रहा। अधिकारियों ने यहां चल रही परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति भी मंत्री के सामने रखी।
शामली के प्राचीन मंदिर को मिलेगा नया स्वरूप
बैठक में शामली सदर क्षेत्र के आदमपुर गांव स्थित प्राचीन पृथ्वी वाला मंदिर के पर्यटन विकास का प्रस्ताव भी रखा गया। योजना के मुताबिक मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं के साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी बेहतर व्यवस्था मिल सके।
सात प्राचीन शिव मंदिरों के संरक्षण की तैयारी
धर्मार्थ विभाग ने सहारनपुर जिले के सात प्राचीन शिव मंदिरों के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव रखा। इनमें पुवारका, खजुरी अकबरपुर, सकलापुरी, दीनारपुर, चुनहटी शेख, भाऊपुर और तेरीपुरा के मंदिर शामिल हैं। करीब 1.84 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं का मकसद धार्मिक धरोहरों का संरक्षण करना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। संस्कृति विभाग ने नकुड़ विधानसभा क्षेत्र के ऐतिहासिक रामलीला मैदान के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव भी रखा। योजना के तहत मैदान को सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि स्थानीय परंपराओं को नया मंच मिल सके।
शुकतीर्थ में कई बड़े प्रोजेक्ट पर चल रहा काम
बैठक में वर्ष 2024-25 और 2025-26 की स्वीकृत परियोजनाओं की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी देखी गई। जयवीर सिंह ने अधिकारियों से नियमित निरीक्षण करने और सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरे कराने के निर्देश दिए। बैठक में शुकतीर्थ धाम में चल रही परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई। यहां करीब 21.24 करोड़ रुपये की लागत से Tourist Facilitation Centre, 6.44 करोड़ रुपये से म्यूरल और Signage, 19.91 करोड़ रुपये से गंगा घाट का सौंदर्यीकरण, 4.80 करोड़ रुपये से श्रीमद्भागवत कथा केंद्र और 12.68 करोड़ रुपये की लागत से Sound, Light and Laser Show तैयार किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शुकतीर्थ को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में मजबूत पहचान दिलाना है।
बैठक के दौरान जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी 18 मंडलों में पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा कर रही है। इसका उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संवारने के साथ पर्यटन सुविधाओं का लगातार विस्तार करना है।






